चंबा (टिहरी)। तीन वर्ष पुराने मामले में सौड़ गांव की महिला हिंसा की शिकार पीड़िता को न्याय दिलाने पहुंची महिला समाख्या और पुलिस टीम को बैरंग लौटना पड़ा। टीम ने बताया कि पीड़िता के ससुर ने पैतृक साझा संपत्ति में हिस्सा देने में आनाकानी कर दी, जिस पर घर पर न्यायालय का नोटिस चस्पा कर फिर से न्यायालय में गुहार लगाने की बात कही।
प्रखंड के सौड़ गांव निवासी शकुंतला देवी को अपने पति की मृत्यु के बाद घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ा और उसे घर से निकाल दिया गया। पीड़िता और उसकी पुत्री छत की तलाश में भटकते रहे हैं। तीन साल पहले यह मामला महिला समाख्या पहुंचा। पहले काउंसिलिंग की गई। इसके बाद गांव में पंचायत बुलाकर पीड़िता को आवास और खेत दिलाने पर सहमति बनी, लेकिन कुछ समय बाद पीड़िता के ससुर ने मकान और खेत छीन लिए। इसके बाद मामला सीजेएम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने महिला के ससुर एसी रमोला को पैतृक साझा संपत्ति में अपनी बहु को एक कमरे का सेट देने का आदेश दिया था। इस पर बुधवार को महिला समाख्या की जिला संदर्भ व्यक्ति रीना पंवार, स्वयं सेवी संस्था राड्स के सुशील बहुगुणा पुलिस टीम को लेकर पीड़िता को अधिकार दिलाने के लिए गांव पहुंचे। उन्होंने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पीड़िता को उसके अधिकार देने की बात कही। घंटों चली बहस के बाद एससी रमोला ने पैतृक संपत्ति में हिस्सा देने से मना कर दिया तो टीम ने नोटिस को घर पर चस्पा कर दिया। महिला समाख्या की जिला संदर्भ व्यक्ति रीना पंवार ने बताया कि महिला को न्याय दिलाने के लिए न्यायालय में दोबारा से अपील की जाएगी।