गोपेश्वर। पांच माह पहले दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त निजमुला-पाणा ईराणी पैदल मार्ग को वन विभाग अब तक दुरुस्त नहीं कर पाया है। जिससे ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कतें हो रही हैं। यह पैदल मार्ग निजमुला घाटी के गांवों को जोड़ने के साथ ही पथारोहण के लिए भी जाना जाता है। इससे होकर दुग्ध कुंडी और 60 किमी दूर हिमाच्छादित चोटी सप्तकुंड जाया जाता है। इन दिनों पाणा, ईराणी, झींझी के साथ ही अन्य गांवों के ग्रामीण कई जगहों पर क्षतिग्रस्त मार्ग पर पैदल आवाजाही कर रहे हैं। ग्रामीण अपने गांवों से आलू, राजमा और चौलाई भी बाजार तक नहीं ला पा रहे हैं।
जिला पंचायत सदस्य गजेंद्र रावत, रघुवीर बिष्ट, महेंद्र नेगी तथा भजन सिंह का कहना है कि मार्ग अवरुद्ध पडे़ होने से क्षेत्र में रसोई गैस, मिट्टी तेल और रसद का संकट बना हुआ है। इधर, बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ जीसी सिंह का कहना है कि जिला प्लान के तहत यहां रास्तों और पैदल पुलों का निर्माण किया जाना है। लेकिन अब तक इसके लिए धन नहीं मिला है।