नई टिहरी। जिले में इस वर्ष अतिवृष्टि और आपदा से जल संस्थान की बड़ी-छोटी 337 पेयजल योजनाओं को नुकसान पहुंचा है। सभी क्षतिग्रस्त योजनाओं के मरम्मत के लिए करीब 7.84 का प्रस्ताव तैयार किया है। आपदा के कारण घनसाली में सबसे अधिक 196 योजनाएं को नुकसान पहुंचा है।
आपदा और अतिवृष्टि के कारण जिले में जल संस्थान की घनसाली, नई टिहरी और देवप्रयाग शाखा की कई पेयजल योजनाओं को नुकसान पहुंचा है। तीन शाखाओं ने उनके अधीन आने वाली क्षतिग्रस्त हुई पेयजल योजनाओं की रिपोर्ट तैयार विभाग के मुख्य कार्यालय नई टिहरी सौंपा दी है। जल संस्थान की इकाइयों को योजनाओं की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए अब बजट का इंतजार है।
विभागीय अधिकारियों की माने तो घनसाली के अधीन आने वाली 196, नई टिहरी की 142 तथा देवप्रयाग की 54 योजनाओं को नुकसान पहुंचा है। जिसमें पेयजल लाइनों और योजनाओं के हैड आदि शामिल हैं।
क्षतिग्रस्त योजनाओं पर पुराने और प्लास्टिक पाइप आदि लगाकर अस्थाई मरम्मत के बाद पेयजल की बहाली की गई है लेकिन समय से योजनाओं की स्थायी मरम्मत नहीं हुई तो गर्मियों में दिक्कतें आ सकती है। विभागीय अधिकारियों ने घनसाली की पेयजल योजनाओं की मरम्मत के लिए 3 करोड़ 87 लाख 8 हजार, नई टिहरी के लिए 3 करोड़ 1 लाख तथा देवप्रयाग 1 करोड़ 5 लाख 55 हजार की जरूरत आंकी है।
इन पेयजल योजनाओं को पहुंचा नुकसान
घनसाली की वनचुरी, गिदडकी, विनयखाल,श्रीगढ़,गवाणा, भाती-बूढाकेदार, डालगांव, धनगड़, सौला, देवप्रयाग की कोटेश्वर-सिल्काखाल, सूरज कुंड, रानीताल, कडोली, भरपूर, नई टिहरी की चंबा-रानीचौरी, देवली तल्ली सहित कई अन्य योजनाएं शामिल हैं।
क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं के मरम्मत कार्य का प्रस्ताव तैयार कर जिला आपदा प्रबंधन विभाग को भेज दिया है। जहां से उसे शासन को भेज जाएगा। धनराशि उपलब्ध होने के बाद क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत और पुनर्निमाण कार्य करवाया जाएगा।
प्रशांत भरद्वाज, ईई जल संस्थान नई टिहरी।