चंबा(टिहरी)। एसआरटी परिसर बादशाहीथौल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने जलवायु परिवर्तन के कारणों को स्पष्ट करते हुए शोध पत्र प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति व वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रोकना जरूरी है।
रविवार को भूगर्भ विज्ञान की पहल पर आयोजित तीन दिवसीय जलवायु परिवर्तन और आपदा न्यूनीकरण संगोष्ठी का समापन हो गया। दिल्ली विवि के प्रो. वरुण जोशी और प्रो. सूर्यप्रकाश ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में हो रहे भूकंपीय प्रभाव, उनसे निकलने वाली चुंबकीय किरणों का मानवीय जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। वाडिया संस्थान देहरादून के प्रो. देवीदत्त चौनियाल, डा. एसके बरतरिया ने शोध पत्र के माध्यम से बताया कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव हिमालयी क्षेत्र के साथ ही मैदानी क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है। संयोजक डा. एनपी नैथानी ने कहा है कि संगोष्ठी से जहां विभाग को लाभ होगा, वहीं विभिन्न शोध पत्रों के भविष्य में प्रकाशन से शोधार्थीयों को अध्ययन सामग्री मिलेगी। पोस्टर प्रतियोगिता में पीजी कालेज नई टिहरी के डा. गुरुपथ गुसाईं प्रथम रहे। इस मौके पर परिसर निदेशक प्रो. आरसी रमोला, श्रीदेव सुमन विवि के कुलसचिव डा. दीपक भट्ट, डा. जेडीएस नेगी, डा. आरबी गोदियाल, डा. सुमन गुसाईं, डा. एमएस सती, हंसराज बिष्ट, डा. दिनेश नेगी, डा. संजू सजवाण, डा. कविता काला, डा. वीपी सेमवाल, डा. पीसी पैन्यूली, डा. शंकर लाल, डा. आशा डोभाल, डा. शालिनी रावत, डा. मुक्ता डंगवाल, डा. केसी पेटवाल, डा. केके बंगवाल, गीता नैथाणी, डा. एसआर राणा, डा. मोहम्मद इरफान, डा. अर्चना बहुगुणा मौजूद थे।