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नीतियां बनाने में सरकार रही नाकाम

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नई टिहरी। स्थायी राजधानी गैरसैंण समेत पहाड़ के तमाम सवालों को लेकर पंचेश्वर से उत्तरकाशी तक की जन संवाद यात्रा 15वें दिन टिहरी पहुंची। उन्होंने कहा कि 18 साल में स्थायी राजधानी, जल, जंगल, जमीन, रोजगार को लेकर नीतियां बनाने में सरकारें नाकाम रही है।
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स्थायी राजधानी गैरसैंण संघर्ष समिति के ओर से चलाई जा रही यात्रा का वरिष्ठ पत्रकार महिपाल नेगी, सुशील बहुगुणा समेत कई लोगों ने स्वागत किया। यात्रा के संयोजक चारु तिवारी ने कहा कि भाजपा-कांग्रेस ने 18 सालों में उत्तराखंड को छलने के सिवा कुछ नहीं किया। आंदोलनकारी प्रदीप सती ने कहा कि भाजपा-कांग्रेस ने लगातार राजधानी के मुद्दे को हाशिए पर धकेला है। आंदोलनकारी मोहित डिमरी ने कहा कि संवाद यात्रा सत्ताधारियों के लिए एक अल्टीमेटम है। सल्ट के जिला पंचायत सदस्य नारायण रावत ने कहा कि गैरसैंण को प्रदेश की स्थायी राजधानी घोषित करनी चाहिए। आंदोलनकारी मनीष सुंदरियाल, नारायण बिष्ट और पिथौरागढ़ के युवा मुकुल भट्ट ने कहा कि सरकार पहाड़ की जमीनों को उद्योगपतियों के हवाले करने की साजिश की जा रही है। नमन चंदोला ने कहा कि कृषि उत्तराखंड की रीढ़ रही है। कमला पंत, योगेश भट्ट, जयदीप सकलानी, सतीश धौलाखंडी, त्रिलोचन भट्ट, लोकेश मिश्रा, विनोद बगियाल, लुसुन टोडरिया, सुरेश नेगी, अंबुज शर्मा आदि का 15 सदस्यीय दल भी समर्थन देने पहुंचा। इस मौके पर इशरार अहमद फारूकी, मुशर्रफ अली, देवेंद्र नौडियाल, एसएम बिजल्वाण, देवेंद्र नौडियाल, साब सिंह सजवाण, उत्तम तोमर, कुंभीबाला भट्ट, गुड्डी रावत, गीता चौहान, कविता रणावत आदि मौजूद थे।
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