नई टिहरी। राजकीय इंटर कालेज छापराधार से सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य अपनी अफसरशाही का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। रिटायर्ड होने के बाद उन्होंने किसी को अपना कार्यभार नहीं सौंपा, जिससे वह चार माह से असंवैधानिक रूप से बतौर प्रधानाचार्य प्रशासनिक और वित्तीय कार्य करते आ रहे हैं। अब मामला सार्वजनिक होने पर अधिकारी संबंधित बीईओ से स्पष्टीकरण मांगने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
चंबा ब्लॉक के जीआईसी छापराधार में कार्यरत प्रधानाचार्य 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो गए थे। उसके बाद उन्होंने सेवा विस्तार के लिए आवेदन किया, लेकिन बताया जा रहा है कि उनका आवेदन निरस्त किया गया है। बावजूद प्रधानाचार्य के पद से रिटायरमेंट होने के बाद उन्होंने किसी को भी अपना कार्यभार नहीं सौंपा और न ही शिक्षा विभाग ने उनसे कार्यभार लेकर दूसरे को सौंपने की जहमत उठाई है और वे बतौर प्रधानाचार्य सभी प्रशासनिक और वित्तीय कार्य कर रहे हैं। इस दौरान जहां कई छात्र-छात्राओं को ट्रांसफर सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं, वहीं सबसे अहम बात यह है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा की अंकतालिका और सर्टिफिकेट भी उन्हीं के हस्ताक्षर से जारी किए गए हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि भविष्य में ऐसे प्रमाणपत्र की जांच होने पर शिक्षा विभाग के पास क्या जवाब होगा। यहां तक कि बोर्ड परीक्षाओं के फार्म भी इसी दौरान भेजे गए और शिक्षक-कर्मचारियों के वेतन बिल भी स्वयंभू प्रधानाचार्य ही भेज रहे हैं। बीईओ शैलेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि जीआईसी छापराधार में बतौर प्रधानाचार्य कार्यरत बृजमोहन डोभाल सेवानिवृत्त हो गए हैं, लेकिन अभी तक वही प्रधानाचार्य का कार्यभार संभाले हुए हैं। वहीं सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य बृजमोहन डोभाल का कहना है कि जीआईसी छापराधार से 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त के बाद अभी तक मैं ही प्रधानाचार्य का काम देख रहा हूं। मैने सत्रांश लाभ के लिए आवेदन किया था, लेकिन कागज देर से पहुंचने की बात कहकर लाभ नहीं दिया जा रहा है। इसके लिए मैं अब न्यायालय की शरण में जाऊंगा।
सेवानिवृत्ति के बाद वह बतौर प्रधानाचार्य वित्तीय और प्रशासनिक काम नहीं कर सकते हैं। अगर वह ऐसा कर रहे हैं, तो गलत हैं। मामले में बीईओ से रिपोर्ट मांगी जाएगी।
-एसपी सेमवाल, डीईओ, माध्यमिक टिहरी।