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मनरेगा और बीआरजीएफ में 7 लाख

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नई टिहरी। प्रतापनगर के ग्राम पंचायत भरपूर में मनरेगा, पिछड़ा क्षेत्र विकास निधि (बीआरजीएफ) और 13वें वित्त के तहत किए गए विकास कार्यों में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है। जिला पंचायत राज अधिकारी की जांच रिपोर्ट में सात लाख 80 हजार और 786 रुपये के गबन की शिकायत सही पाई गई। जांच रिपोर्ट आने के डेढ़ साल बाद भी आरोपियों से गबन की गई सरकारी धन की वसूली न होने पर क्षेत्र के लोगों ने रोष जताया है। इस संबंध के एक प्रतिनिधिमंडल डीएम सोनिका से मिला और उन्हें जांच पत्र की प्रतियां सौंपी। डीएम ने सीडीओ को गबन धनराशि की जल्द वसूली के निर्देश दिए हैं।
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ग्राम पंचायत भरपूर के ममराज सिंह ने जिला पंचायत राज अधिकारी को 20 जनवरी 2016 को एक शिकायती पत्र सौंपा था, जिसमें उन्होंने ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों में धांधली होने की शिकायत की थी, जिस पर 20 जून को विद्या सिंह सोमनाल जांच के लिए भरपूर गांव पहुंचे। जांच में उन्होंने पाया कि मनरेगा के तहत तीन लाख 49 हजार 227 रुपये से पानी निकासी के लिए नाली और सुरक्षा दीवार निर्माण दिखाया गया। मौके पर नाली निर्माण नहीं मिला। धौड़की नामे तोक में चार लाख 99 हजार की लागत से भूमि सुधार का कार्य किया गया, लेकिन योजना स्थल पर कोई बोर्ड नहीं पाया गया है। निगरानी समिति की पत्रावली में चार लाख 41 हजार की रसीद लगी हुई है, जिस पर न तो कार्य का नाम स्पष्ट लिखा गया है और न ही रसीद प्रमाणित है। पत्रावली में लगे तीनों कोटेशन पर तिथि अंकित नहीं है।
20 सितंबर 2016 को दी गई जांच रिपोर्ट में जिला पंचायत राज अधिकारी ने बीडीओ प्रतापनगर को ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, अवर अभियंता मनरेगा, रोजगार सहायक, लेखाकार और प्रधान से सात लाख 80 हजार 786 की वसूली करने के निर्देश दिए थे, लेकिन डेढ़ साल भी आरोपियों से वसूली न होने पर भरपूर गांव के ममराज सिंह, रामदेव और कीर्ति सिंह डीएम से मिले।
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