नई टिहरी। केंद्र सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन भिलंगना ब्लॉक के काश्तकार इससे अनजान है। केमर और आरगढ़ पट्टी के गांवों में बड़े पैमाने पर हल्दी, अदरक, प्याज, लहसुन और मिर्च का उत्पादन होता है, लेकिन नगदी फसल को प्रोत्साहन देेने के लिए काश्तकारों को प्रशिक्षण देने की कोई व्यवस्था नहीं है। बीज भी काश्तकारों को मुहैया नहीं कराए जा रहे हैं।
भिंलगना ब्लॉक के सुनारगांव, मयकोट, कोठियाडा, अणुवा, चमियाला, तुंगाणा, बौंगा, श्रीकोट, बेलेश्वर, सिल्यिारा, गनगर, पेडाभल्डली, केमरासौड में बड़े पैमाने पर नगदी फसलों का उत्पादन होता है। 18 किमी लंबी कोठियाडा और चमियाला नहर से गांव के काश्तकारों को खेतों में सिंचाई करने के लिए पर्याप्त पानी भी उपलब्ध है।
काश्तकार सोहन सिंह बिष्ट, जीतराम रतूड़ी, शिवा देवी, बलदेव सिंह नेगी, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रजनी नेगी, खजानी देवी का कहना है कि सभी गांव चारधाम यात्रा के प्रमुख मार्ग एलकेसी से जुड़े हुए हैं, लेकिन सरकार की ओर से नगदी फसलों की पैदावार बढ़ाने देने के लिए कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है। भले ही सरकार दो प्रतिशत ब्याज पर किसानों को कृषि ऋण देने का दावा कर रही है, लेकिन पात्रों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कोट
नगदी फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए काश्तकारों को प्रशिक्षण देना शुरू नहीं हो पाया है। अब प्रगतिशील किसानों की सूची तैयार कर उन्हें प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा रही है। हल्दी के बीज का दाम अधिक होने के कारण काश्तकार उसे 50 फीसदी छूट के बाद भी खरीद नहीं पाता है।
-डा. डीके तिवारी, जिला उद्यान अधिकारी