कंडीसौड़ (टिहरी)। सेरा गांव में भी अब पशु बलि नहीं दी जाएगी। बृहस्पतिवार को आयोजित पूजा में ग्रामीणों ने आपसी विचार-विमर्श के बाद पशु बलि देने की वर्षों पुरानी प्रथा को समाप्त कर करने पर सहमति जताई है, जिससे अब गांव में पूजा-पाठ कर ही देवता की स्तुति की जाएगी।
थौलधार ब्लॉक में सेरा गांव में हर तीसरे वर्ष सामूहिक रूप से पूजा-पाठ कर बकरे की बलि दी जाती रही है। इसी प्रथा के तहत बृहस्पतिवार को भी सेरा गांव में सामूहिक पूजा का आयोजन किया गया था। विधिवत पूजा के बाद जब देवता ने बलि चढ़ाने पर चर्चा हुई, तो कुछ लोगों ने बलि चढ़ाने से इनकार कर दिया। इससे विरोध-समर्थन के साथ गांव में दो पक्ष आमने-सामने आ गए। काफी देर चली चर्चा के बाद ग्रामीणों ने दोनों पक्षों को मनाने का प्रयास किया। बलि प्रथा बंद करने के समर्थन में ज्यादा लोगों के आगे आने के बाद दूसरे पक्ष ने भी सहमति जताई। उसके बाद निर्णय लिया गया कि गांव में अब तीसरे वर्ष होने वाली पूजा में बलि नहीं चढ़ाई जाएगी। पूजा-पाठ से ही देवता को शांत किया जाएगा। उसके बाद सभी लोगों ने पूजा में शामिल होकर प्रसाद वितरण किया। इस मौके पर रामकृष्ण नौटियाल, केशर सिंह नेगी, जगदीश प्रसाद नौटियाल, पीतांबर दत्त जोशी, बचन दास और पिंगल दास आदि मौजूद थे।