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किसानों को बताए घटती मृदा उर्वरता बढ़ाने के उपाय

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नई टिहरी। उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के पर्वतीय परिसर के कृषि विज्ञान केंद्र रानीचौरी एवं कृषि विभाग की ओर से विश्व मृदा दिवस पर गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें घटती हुई मृदा की उर्वरता क्षमता को बढ़ाने, मृदा को स्वस्थ रखने और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के बारे में जानकारी दी गई।
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रानीचौरी में आयोजित गोष्ठी का विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सीएम शर्मा ने शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने कर लक्ष्य रखा है, लेकिन यह तभी संभव होगा, जब किसान उन्नत किस्म की पैदावार करेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार ने आय को बढ़ाने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की है। जिसका किसानों का लाभ लेना चाहिए। चंबा की ब्लाक प्रमुख आनंदी नेगी ने कहा कि विभिन्न कारणों से उपज घट रही है, इसको बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों को किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिए। केंद्र के प्रभारी अधिकारी डा. आलोक येवले, ई. कीर्ति कुमारी ने कृषि विज्ञान की विभिन्न गतिविधियों से कृषकों को अवगत कराते हुए खेती, बीजों, मृदा स्वास्थ्य कार्ड की उपयोगिता बताई। वैज्ञानिक डा. तेजपाल बिष्ट, कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी भगवान दास ने मृदा की महत्ता को बताते हुए जैविक खाद, वर्मी कंपोस्ट आदि की जानकारी दी। गोष्ठी में 300 से अधिक किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी वितरित किए गए। इस मौके पर शशिबाला, मनीष डबराल, विनोद रमोला, सीता मखलोगा, लक्ष्मी बहुगुणा, शिवशरण डोभाल, सुनीता देवी, गुट्टा देवी, खिलानंद आदि मौजूद थे।
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