सड़क हादसों को रोकने के लिए परिवहन विभाग और लोक निर्माण विभाग रणनीति ही बनाते रहे और हादसे बढ़ते गए। विभागों की कोई कवायद काम नहीं आई। वर्ष 2014 की तुलना में 2015 में अधिक हादसे हुए हैं।
टिहरी गढ़वाल क्षेत्र हादसों के मामलों में प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है। साल भर में यहां सबसे अधिक हादसे हुए और इनमें मरने वाले लोगों की संख्या भी सबसे अधिक है।
टिहरी गढ़वाल के बाद सड़क हादसों में पिथौरागढ़ दूसरे और प्रदेश की राजधानी देहरादून तीसरे स्थान पर रही। पूरे साल भर परिवहन और लोक निर्माण विभाग अलग-अलग रणनीति बनाने का दावा करता रहा है। सचिव परिवहन सीएस नपल्च्याल ने हर जिले में डीएम की अगुवाई में कमेटी गठित की थी।
खाई में गिरने से बचाने के लिए बनाई गई थी सुरक्षा दीवार की रणनीति
Accident
तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में कमेटी की बैठक में तय किया गया था कि इसमें स्वयंसेवी संगठनों, राजनीतिक दलों और क्षेत्रीय लोगों को भी शामिल किया जाए।
लोक निर्माण विभाग ने सड़कों को दुरुस्त करने के साथ वाहनों को खाई में गिरने से बचाने के लिए सुरक्षा दीवार आदि की रणनीति बनाई, लेकिन हादसों के आंकड़ों से नतीजा ढाक के तीन पात नजर आ रहा है।
आंकड़ों में व्यवस्था की हकीकत
वर्ष 2015 टिहरी गढ़वाल हादसे-64, मौत-86, घायल-220
पिथौरागढ़ हादसे-28, मौत-54, घायल-61
देहरादून हादसे-16, मौत-43, घायल-96
प्रदेश में कुल हादसे -207 मौत-329 घायल-799
वर्ष 2014 टिहरी गढ़वाल हादसे-43, मौत-75, घायल-168
पिथौरागढ़ हादसे-13, मौत-21, घायल-33
देहरादून हादसे-06, मौत-33, घायल-24
प्रदेश में कुल हादसे- 150 मौत-253 घायल-624