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उत्तराखंड में फिर रावत 'राज', केंद्र ने की राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश

Wed, 11 May 2016 10:59 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
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उत्तराखंड विधानसभा में बहुमत परीक्षण के बाद बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया। बहुमत परीक्षण में हरीश रावत की जीत हुई और भाजपा को मुंह की खानी पड़ी।
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अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हरीश रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति शासन हटाकर सरकार कोर्ट को सूचित करे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश कर दी। संसद भवन में दोपहर 12.45 बजे कैबिनेट की संक्षिप्त बैठक में राष्ट्रपति से राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश करने का फैसला किया गया।
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उत्तराखंड विधानसभा में हुए बहुमत परीक्षण में हरीश रावत को 61 में से 33 वोट मिले हैं। जबकि रावत के विपक्ष में 28 वोट पड़े हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बहुमत परीक्षण के लिए हुए मतदान में किसी भी प्रकार की कोई अव्यवस्‍था नहीं हुई है। इस दौरान कोर्ट ने केंद्र को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के रिकॉर्ड ऑर्डर को पेश करने को कहा।

इससे पहले केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हरीश रावत ने बहुमत साबित कर दिया है। और अब उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटाया जा सकता है।
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मंगलवार को ही हरीश रावत सूबे के सरताज नजर आए

हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
विधानसभा के प्रधान स‌चिव और सचिव मंगलवार को उत्तराखंड में हुए बहुमत परीक्षण के परिणाम दो सील बंद सील बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को लेकर पहुंचे थे। बताया गया कि एक लिफाफे में विधायकों के मत रखे गए थे। जबकि दूसरे लिफाफे में विधानसभा अध्यक्ष का मत था।

उधर, फ्लोर टेस्ट के बाद मंगलवार को ही पूर्व सीएम हरीश रावत सूबे के सरताज नजर आए। सुप्रीम कोर्ट की निगहबानी के चलते स्पष्ट नहीं कहने की मजबूरी के बावजूद कांग्रेस कैंप में दिवाली का आलम था, भाजपा के हावभाव खुद ही शिकस्त की कहानी कह रहे थे।

सदन से निकले भाजपा-कांग्रेस के विधायकों की कानाफूसी से ऐसे संकेत मिले थे कि कांग्रेस के पक्ष में 33 और भाजपा के पक्ष में 28 मत पड़े हैं। यही सच बुधवार को सामने आ गया।

इससे यह भी साफ हो गया कि पीडीएफ (बसपा-निर्दलीय) को भाजपा का कोई भी दांव डिगा नहीं सका और वे पूरी मजबूती से कांग्रेस के साथ रहे।

सोमेश्वर से कांग्रेस विधायक रेखा आर्य और घनसाली से भाजपा विधायक भीमलाल ने खुला खेल खेला। वे सदन में जाते वक्त ही अपनी पार्टी के व्हिप के खिलाफ खड़े नजर आए थे।
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