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सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ना क, ख ग...

Wed, 31 Jul 2013 04:14 PM IST
त्यूनी/महेश कुमार
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उत्तराखंड सरकार भले ही सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हो लेकिन असल धरातल पर मामला गोल है। सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर बहुत पहले से ही प्रश्नचिन्ह लगते रहें हैं, लेकिन बावजूद इसके सरकार सरकारी स्कूलों का स्तर सुधारने को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है।
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बात जौनसार बावर की करें तो यहां के सरकारी स्कूलों से छात्रों का मोह भंग होता जा रहा है। यहां के स्कूलों में साल दर साल छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आ रही है। विभाग के बीते चार साल के आंकडे़ इसकी तस्दीक कर रहे हैं।

सरकार के आंकडों में झलक रही कमजोरीः
आंकडेबाजी में माहिर उत्तराखंड सरकार के आंकड़े ही इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि गुणवत्ता के अभाव में छात्र सरकारी स्कूलों से बड़े पैमाने पर शैक्षिक पलायन करने को विवश हैं।
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जौनसार बावर क्षेत्र में हाईस्कूल और इंटर में इस साल छात्रों की संख्या में रिकार्ड गिरावट दर्ज की गई है। जिससे शिक्षा विभाग के आला अधिकारी भी सकते में है।

जौनसार बावर की बदहाल शिक्षा व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है। स्कूलों में आज भी शिक्षकों के कई पद खाली हैं। यही वजह है कि प्रति वर्ष स्कूलों में छात्र संख्या घटती जा रही है। चकराता विकासखंड में 214 प्राथमिक, 20 हाईस्कूल और 10 इंटर कालेज हैं।

प्रतिवर्ष गिर रहा ग्राफः
वर्ष 2010 में जहां इंटर में छात्र संख्या दस हजार थी, वहीं चालू शिक्षा सत्र में यह संख्या घटकर महज 3650 रह गई है। कमोबेश यही स्थिति हाईस्कूलों में भी बनी हुई है। वर्ष 2010 में जहां छात्र संख्या 6458 थी, वहीं वर्तमान सत्र में यह संख्या सिमटकर 3841 रह गई हैं।

इसके पीछे शिक्षाविद् भी गुणवत्तापरक शिक्षा के अभाव को ही जिम्मेदार मानते हैं। शिक्षाविद् और पूर्व प्रधानाचार्य केआर जोशी का कहना है कि गुणवत्ता परक शिक्षा न होने के कारण स्कूलों में छात्रों की संख्या घट रही है।

निजी स्कूलों की ओर बढ़ गए अभिभावकः
सरकारी स्कूलों की लचर कार्यप्रणाली और घटिया शिक्षा वयवस्था के चलते जनजातीय क्षेत्र के अधिकांश लोग अपने नौनिहालों के भविष्य को लेकर इतने अधिक चिंतित हैं कि वह पलायन कर विकासनगर और आसपास के इलाकों में बस गए हैं। जहां वे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने को तरजीह दे रहे हैं, ताकि उनको बेहत्तर शैक्षिक माहौल और शिक्षा मिल सके।

इनकी भी सुनिएः
स्कूलों में शिक्षकों की कमी और पलायन छात्रों की घटती संख्या की सबसे बड़ी वजह है। ग्रामीण परिवेश में अच्छी शिक्षा प्रदान करने के लिए विभाग खाली पडे़ पदों को शीघ्र भरने के लिए प्रयासरत है।
- एसपी खाली सीईओ

एक नजर आंकडों परः
वर्ष प्राथमिक हाईस्कूल इंटर 2010 9141 6458 10000 2011 8827 6253 6530 2012 8705 6718 5733 2013 7198 3841 3650
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