वर्ष 2014 तक आप कहां होंगे। आप क्या दुनिया कहां होगी, लेकिन उत्तराखंड के गांवो को आगे भागने की कोई जल्दी नहीं है, यहां 2014 में भी लोग केवल सड़क ही मांग रहे हैं।
सब कुछ ठीक रहा तो 2014 के आखिरी तक निजमुला घाटी के पाणा, ईराणी और झींझी गांव के ग्रामीण अपने गांवों तक बसों से पहुंच सकेंगे।
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घाटी के भ्रमण पर पहुंचे डीएम
वहीं 2015 में वह मोबाइल फोन से एक-दूसरे से बात भी कर सकेंगे। ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया है घाटी के भ्रमण पर पहुंचे डीएम एसए मुरुगेशन ने।
आठ अक्तूबर को डीएम निजमुला से 35 किमी की पैदल दूरी तय कर देर रात आठ बजे ईराणी गांव पहुंचे। उन्होंने जूनियर हाईस्कूल ईराणी में रात्रि विश्राम किया। डीएम के साथ 17 अधिकारी और तीन चिकित्सकों की टीम भी मौजूद थी।
पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ स्वागत किया
9 अक्तूबर को ईराणी गांव के पंचायती चौक में पहुंचने पर डीएम का ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ स्वागत किया। डीएम ने ग्रामीणों से पाणा, ईराणी और झींझी गांवों को सड़क से जोड़ने का वायदा किया। उन्होंने कहा कि पैदल आने से वे ग्रामीणों की दिक्कतों को महसूस कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के अंत तक ईराणी के लोग पैदल नहीं बल्कि वाहनों से गांव तक पहुंचेंगे। वर्ष 2015 तक निजमुला घाटी में बीएसएनएल मोबाइल टावर स्थापित कर दिया जाएगा।
केंद्र न छोड़ने के निर्देश
डीएम ने ऊर्जा निगम के अधिशासी अधिकारी को शीघ्र क्षेत्र में बिजली पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने सीएमओ को क्षेत्र में मौजूद एएनएम और फार्मासिस्ट को किसी भी सूरत में केंद्र न छोड़ने के निर्देश दिए।
डीएम ने कहा कि अक्तूबर माह के अंत में गौंणा गांव में बहुउद्देश्यीय शिविर किया जाएगा। क्षतिग्रस्त पैदल रास्तों और खेत-खलियानों की मरम्मत मनरेगा योजना में करने के लिए कहा। मौके पर ही बीडीओ को गांव में मनरेगा योजना कार्य शुरू कराने के निर्देश भी दिए।
ग्रामीणों को सुविधाएं नहीं मिल पाई
ग्रामीणों की शिकायत पर डीएम ने जूनियर हाईस्कूल ईराणी के शिक्षक को नियमित स्कूल में रहने के निर्देश दिए। 27 वर्ष पहले भी मिले थे आश्वासन निजमुला घाटी में 27 वर्षों बाद जिलाधिकारी सहित जिला स्तरीय अधिकारियों को देख ग्रामीणों के उत्साह का ठिकाना नहीं रहा। वर्ष 1987 में जिलाधिकारी रविंद्र सिंह ने पाण, ईराणी और झींझी गांवों का दौरा किया था।
उस दौरान भी तत्कालीन जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को गांवों तक मोटर मार्ग और बिजली पहुंचाने का आश्वासन दिया था, लेकिन 27 वर्षों बाद भी ग्रामीणों को सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।