पाषाण युग की महिलाएं आधुनिक पुरुषों से कई गुना अधिक मजबूत कद-काठी वाली थीं। उनकी हड्डियां आज के इंसानों की तुलना में अधिक चौड़ी और मजबूत थीं।
वे खुद ही शिकार भी किया करती थीं। नर्मदा घाटी में मिले जीवाश्मों की जांच से यह खुलासा हुआ है। इन गुफाओं में एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के वैज्ञानिकों को 70 हजार साल पुरानी महिलाओं की अस्थियों के टुकड़े मिले हैं।
वैज्ञानिकों के मुताबिक ये जीवाश्म पाषाण युग के आखिरी चरण के हैं। उस दौर में पत्थरों से बने औजारों के इस्तेमाल के साथ वन्य जीवों की अस्थियों के औजारों का भी इस्तेमाल होने लगा था। इस काल की महिलाएं आत्मरक्षा या शिकार के लिए पुरुषों के साथ मिलकर जंगली जानवरों से लोहा लेती थीं।
अपने क्षेत्र में किसी दूसरे समूह की घुसपैठ पर भी वे मोर्चा संभाल लेती थीं। यही वह दौर था, जब आधुनिक मानव के पुरखों में सामाजिकता की भावना पैदा हुई। पुरुषों और महिलाओं के संबंध नया आयाम ले रहे थे, जिनसे आधुनिक मानव समाज की आधारशिला रखी जानी थी।
नर्मदा घाटी की गुफाओं के आसपास दो छेद वाला हड्डी से बना गहना भी मिला है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसी काल में महिलाओं के जानवरों की हड्डियों के गहन पहनने का चलन भी शुरू हुआ। हाथी की हड्डी से बने इस गहने को कुछ वैज्ञानिक ताबीज मान रहे हैं।
माना जा रहा है कि इन तबीजों को प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए सुरक्षा कवच के तौर पर इस्तेमाल किया जाता होगा। उस वक्त तक ‘आर्केइक होमो सैपियंस’ छेद करने का हुनर जान चुका था। वैज्ञानिकों को हाथी की हड्डी से बनी खुरपी, ब्लेड की तरह तेज क्लीवर और स्क्रैपर आदि मिले हैं। जांच में ये औजार 70 हजार से एक लाख साल पुराने बताए गए हैं।
‘इन जीवाश्मों के अध्ययन से मानव जीवन के इतिहास का एक नया अध्याय खुल रहा है। महिलाओं की शारीरिक बनावट के बारे में ये जानकारियां काफी महत्वपूर्ण हैं।’
- डॉ. एआर सांख्यान (वरिष्ठ जीवाश्म विशेषण, एएसआई)