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चीन की नई सड़कों में दबे सेना के दावे

Tue, 28 May 2013 04:33 PM IST
देहरादून/अरुणेश पठानिया
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चीन ने लेह में भारतीय सीमा में 5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कर भारतीय दावों की पोल खोल दी है।
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ड्रैगन के सीमा पर बढ़ते दखल के बावजूद सामरिक महत्व की सड़क परियोजनाओं के मामले में उत्तराखंड में स्थिति चिंताजनक है।

रक्षा मंत्रालय अगले 6 वर्षों के भीतर राज्य में 710 किलोमीटर लंबी 45 सड़कों को निर्माण करना चाहता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रक्षा सचिव के चिंता जताने के बावजूद अधिकांश परियोजनाएं लचर सरकारी तंत्र के चलते लटकी हैं।

कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में 370 किलोमीटर लंबी एक दर्जन सड़कें निर्माण के विभिन्न स्तरों पर लटकी हैं। 84 किलोमीटर लंबी चार सड़कों का निर्माण मार्च 2013 तक पूरा करना था, लेकिन उसमें न्यू-टेढांग सड़क का अभी 25 फीसदी कार्य ही हो पाया है। शेष तीन पर 60 फीसदी कार्य ही हुआ है।
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इसके अलावा निर्माणाधीन मलारी से बाड़ाहोती, माणा गांव से माणा पास तथा भैंरोघाटी से नागा सोनम कुमाला होते हुए टी चोकला तक सड़कों का निर्माण कार्य लंबे अरसे से चल रहा है। माणा पास पर 56 किलोमीटर सड़क बनी हैं, लेकिन
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डामरीकरण होना है। धारचूला में चीन सीमा लिपुलेक तक 65 किलोमीटर सड़क निर्माणाधीन है। गुंजी से कुट्टी तक 18 किलोमीटर सड़क बनी है।

मुंशयारी से मिलम के बीच 65 किलोमीटर सड़क भी निर्माणाधीन है। सीमा के साथ सामरिक महत्व की सड़कों को लेकर नई दिल्ली में रक्षा सचिव की अध्यक्षता में अगले माह बैठक प्रस्तावित है। सीमा सड़क निर्माण में भूमि हस्तांतरण, पेड़ों के कटान, स्टोन क्रेशर की अनुमति जैसे मुद्दों को जल्द सुलझाना होगा। पिथौरागढ़ क्षेत्र में बीआरओ को एक स्टोन क्रेशर की आवश्यकता है।

एक वर्ष से सेना स्टोन क्रेशर की अनुमति मांग रही है, लेकिन फाइल पर विभागीय आपत्तियां लगाकर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
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