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बाबा रामदेव के विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ाई जाती हिंदी

Tue, 28 May 2013 12:28 AM IST
हरिद्वार/कौशल सिखौला
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राष्ट्रवाद और स्वदेशी की अलख जगाने वाले योग गुरु बाबा रामदेव के अपने विश्वविद्यालय से राष्ट्रभाषा सिरे से गायब है।
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बाबा रामदेव जिस पतंजलि विवि के कुलाधिपति हैं, उस विवि में विषय के रूप में हिंदी नहीं पढ़ाई जाती।

पर्यटन, दर्शन, मनोविज्ञान जैसे अनेक विषय योग के साथ पढ़ाए जाते हैं। हालांकि पतंजलि के सूत्र बताते हैं कि हिंदी जल्द ही यहां के पाठ्यक्रम में शामिल की जाएगी।

उत्तराखंड की नारायण दत्त तिवारी सरकार ने वर्ष 2005-06 में बाबा रामदेव को पतंजलि विवि चलाने की अनुमति दी थी।

एनडी तिवारी ने स्वयं पतंजलि योग पीठ आकर बाबा रामदेव को विवि के अधिपत्र सौंपे थे। तब से विवि में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर योग विज्ञान, योग स्वास्थ्य विज्ञान, सांस्कृतिक पर्यटन, पंचकर्म, दर्शन शास्त्र, मनोविज्ञान आदि विषय पढ़ाए जाते हैं।
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एमए और एमएससी विषयक शिक्षण के दौरान अंग्रेजी और हिंदी भाषा पाठ्यक्रम का माध्यम बनती है, लेकिन एक पृथक विषय के रूप में हिंदी को स्थान नहीं मिल पाया है।

पतंजलि योग पीठ स्थित पतंजलि विवि वस्तुत: योग के लिए निर्मित किया गया था। लेकिन विवि के अधिपत्र को विस्तार देकर अनेक विषयों की पढ़ाई शुरू की गई है।

हाल ही में संस्कृत को बतौर भाषा पाठ्यक्रम में स्थान मिला है। इसके विपरीत न हिंदी का कोई शिक्षक है और न स्नातक अथवा स्नातकोत्तर स्तर पर एक विषय के रूप में इसकी पढ़ाई ही होती है।
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शिक्षा के माध्यम के तौर पर हिंदी में पठन-पाठन की सुविधा है। यह ठीक है कि एक पृथक विषय के रूप में हिंदी को स्थान नहीं मिल पाया है। भविष्य में अवश्य ही हिंदी एक विषय के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल की जाएगी।
-आचार्य बालकृष्ण, कुलपति पतंजलि विवि
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