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गंगोत्री हाईवे का छह किमी हिस्सा नेस्तनाबूद

Mon, 24 Jun 2013 05:06 PM IST
उत्तरकाशी/ब्यूरो
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इस बार उत्तरकाशी से हर्षिल-धराली तक राजमार्ग का छह किमी से अधिक हिस्सा पूरी तरह तबाह होने से इस वर्ष तीर्थयात्रा दोबारा शुरू होने के आसार नहीं हैं। स्थिति यह है कि राजमार्ग पर यातायात बहाली के लिए बीआरओ को मशीनों में तेल डालने के लिए भी पैसा नहीं मिल रहा है।
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गंगोत्री हाईवे पिछले वर्ष अगस्त की आपदा के बाद से अब तक क्षतिग्रस्त है। सड़क ठीक कराने के लिए बीआरओ ने 25 करोड़ का इस्टीमेट दिया था, पर एक धेला नहीं मिला। इस बार तो रही उत्तरकाशी से हर्षिल के बीच करीब छह किमी सड़क वॉशआउट है। इसे तैयार करना दूर की कौड़ी है। छिटपुट जगहों पर यातायात बहाली के लिए बीआरओ को प्रशासन आपदा मद से धेला देने को राजी नहीं।

नगर से सटे गंगोरी में ही हाईवे का बड़ा हिस्सा कटकर भागीरथी में समा गया। इससे आगे हीना, मनेरी, भाटुकासौड़, औंगी, विशनपुर, सैंज, भटवाड़ी, थिरांग, सुनगर, गंगनानी, डबराणी, गोलमू की उडार, सुक्की बैंड, झाला, धराली आदि स्थानों पर कई सौ मीटर सड़क गायब है। अभी मानसून की बारिश सिर पर है, ऐसे में हाईवे की स्थिति का अंदाजा लगाकर बीआरओ के अफसर परेशान हैं।
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इस हाल में काम कर रहा बीआरओ
गंगोत्री से हर्षिल के बीच अवरुद्ध सड़क पर यातायात बहाल करने में बीआरओ के सामने संसाधनों की कमी आड़े आई। गंगोत्री में पार्किंग बना रहे सुरेंद्र चौहान ने अपनी पुकलैंड मशीन दी तथा मंदिर समिति ने गंगोत्री में फंसे वाहनों से डीजल उपलब्ध कराया, तब जाकर बीआरओ यहां यातायात बहाल करा पाया।

जिला जज ने मांगी लिखित शिकायत
जिला जज राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई कोर कमेटी की बैठक में बीआरओ ने प्रशासन द्वारा आपदा के बजट से मशीनों के लिए तेल उपलब्ध न कराने की शिकायत दर्ज कराई। इस पर जिला जज ने लिखित शिकायत करने को कहा, ताकि इसे हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया जा सके।

मिल जाता बजट तो ये नौबत न आती
उत्तरकाशी। बीआरओ के ईई विजय कुमार ने कहा कि न तो उन्हें ऋषिकेश-धरासू सड़क के अनुरक्षण के लिए बजट मिला और न अब आपदा मद से मशीनों के ईंधन के लिए पैसा मिल रहा है। अगर अगस्त की आपदा के बाद सड़क कुछ दुरुस्त कर ली जाती तो अब इसे ठीक करने के लिए 300 करोड़ से ज्यादा बजट खर्च करने की नौबत न आती। छह किमी वॉशआउट सड़क को ठीक करने में काफी बजट व समय खर्च होगा।
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