पंतनगर। प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के चयनित छात्रों ने जैव प्रौद्योगिकी के विभिन्न आयामों में अपना प्रशिक्षण परिषद के हल्दी मुख्यालय में पूरा किया। यह कार्यक्रम जनवरी से जून तक संचालित होता है, लेकिन कोविड-19 के चलते इस बार यह कार्यक्रम अक्तूबर में संपन्न हुआ।
उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद्, हल्दी में छह महीने के लिए संचालित लघु शोध कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी शिक्षा, शोध व विकास को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम परिषद् के प्रशिक्षण, कौशल व दक्षता निर्माण प्रकोष्ठ की ओर से निदेशक डॉ. डीके सिंह के मार्गदर्शन में संचालित किया गया। परिषद के वैज्ञानिक डॉ. सुमित पुरोहित, डॉ. कंचन कार्की और डॉ. मणिंद्र मोहन के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं ने अपना-अपना लघु शोध प्रशिक्षण पादप ऊतक संवर्धन, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी और पर्यावरणीय जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला में पूर्ण किया। छात्र-छात्राओं ने ऊतक संवर्धन, जेनेटिक इंजीनियरिंग, बायो इंफोमेटिक, हाइड्रोपोनिक्स, जल गुणवत्ता आदि से संबंधित आधुनिक विषयों पर शोध कार्य पूरा किया और अपने शोध प्रबंध भी परिषद में जमा किए। प्रशिक्षण में गुरु राम राय कॉलेज देहरादून, जैव प्रौद्योगिकी विभाग भीमताल, सूरजमल अग्रवाल कॉलेज किच्छा, देवस्थली विद्यापीठ लालपुर, एमआईटी गाजियाबाद व एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी के 15 पीजी विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण में परिषद के सभी वैज्ञानिकों और तकनीकी संवर्ग का विशेष योगदान रहा। संवाद
इनको मिले प्रमाणपत्र
प्रशिक्षण पूर्ण करने पर पूजा बथ्याल, सचिन दास, मोना किशोर, ललित दुम्का, नितिन कुमार, प्रीति पाठक, फरीदा, अनुजा सक्सेना, अफजल अंसारी, हिना मलिक, नेहा नेगी, भावना पाठक, रजत दयाल, प्रियंका यादव, रश्मि वधानी आदि को प्रमाण पत्र दिए गए।
प्रत्येक वर्ष जनवरी से जून के मध्य परिषद् द्वारा लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित होता है। जैव प्रौद्योगिकी शिक्षा को शोध से जोड़ने का यह प्रयास है। प्रशिक्षुओं को जैव प्रौद्योगिकी से संबंधित तकनीकों एवं बारीकियों से अवगत कराया जाता है। जो उनको भविष्य में उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करता है। - प्रो. डीके सिंह, निदेशक जैव प्रौद्योगिकी परिषद्, हल्दी।