इस वर्ष 24 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुले थे। इस मौके पर 7039 श्रद्धालु मौजूद थे। 6 माह और 20 दिन चली बाबा केदार की यात्रा में इस वर्ष 1 लाख 54 हजार 430 श्रद्धालु धाम पहुंचे। बीकेटीसी को भी पौने तीन करोड़ की आय हुई। केदारघाटी के व्यवसायियों की भी आमदनी हुई।
8 मई को तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट खुले थे। सीजन में इस धाम में 13 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। 17 मई को द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट भक्तों के लिए खोले गए थे। यहां इस वर्ष 8000 श्रद्धालु पहुंचे, जो आपदा के बाद सबसे अधिक हैं।
इन दोनों धामों में भी मंदिर समिति को अच्छी आय होने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिला। चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के दर्शनों को 6500 श्रद्धालु पहुंचे। श्रीबदरी-केदार मंदिर समिति के प्रचार अधिकारी डा. हरीश गौड ने बताया कि इस वर्ष की पंच केदार यात्रा के तहत केदारनाथ में 1682, रुद्रनाथ में 2820 और कल्पेश्वर में 32 सौ विदेशी श्रद्धालु पहुंचे, जो बीते पांच वर्षों में सर्वाधिक है। पंच केदार कल्पेश्वर के कपाट वर्षभर खुले रहते हैं।
नहीं जुटी जरूरी सुविधाएं
रुद्रप्रयाग। द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर और तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम में इस वर्ष भी श्रद्धालुओं को पानी, शौचालय और ठहरने को लेकर परेशान होना पड़ा। मद्महेश्वर धाम के 12 किमी और तुंगनाथ धाम के 3 किमी पैदल रास्ते पर बीकेटीसी पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं करा पाई है। यहां बिजली सप्लाई को लेकर भी मंदिर समिति और शासन कोई प्रयास नहीं कर पाया हैं।
इस वर्ष पंचकेदार की यात्रा को लेकर कपाट खुलने के दिन से लेकर बंद होने तक श्रद्धालुओं का उत्साह बना रहा। विदेशी भक्तों के पहुंचने का भी नया रिकार्ड बना। भविष्य में पंच केदार सहित अन्य धामों में श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाओं को लेकर अभी तक कवायद शुरू कर दी गई है। -- बीडी सिंह, मुख्य कार्याधिकारी बीकेटीसी