रुद्रप्रयाग। केदारनाथ विस उप चुनाव केदारनाथ मंदिर तक सीमित होकर गया। पूरे प्रचार में कांंग्रेस ने सरकार पर केंदारनाथ मंदिर को लेकर निशाना साधा। वहीं, सरकार भी ज्यादातर मौकों पर सफाई देती रही, जिसके चलते जनता से जुड़े सड़क, स्वास्थ्य, संचार, शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे इस अहम चुनाव में गौण होकर रह गए। अन्य प्रत्याशियों ने भी जनता की नब्ज नहीं पकड़ी।
एक तरफ कांग्रेस जहां पूरे चुनाव प्रचार में सरकार पर केदारनाथ मंदिर को अन्यत्र ले जाने, यात्रा को डायवर्ट करने, यात्रा पंजीकरण, केदारनाथ गर्भगृह के सोना आदि के आरोप लगाती रही। वहीं, भाजपा और सरकार का समय आरोपों की सफाई देने में लगा रहा। भाजपा, केदारनाथ पुनर्निर्माण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड के लगाव पर जोर देती दिखी।
उत्तराखंड क्रांति दल ने भू-कानून व मूल निवास पर शुरुआती दिनों में सरकार को घेरने की कोशिश तो की, पर इसे अपना मुख्य चुनावी हथियार नहीं बना सकी। स्थानीय लोगों का कहना है कि उप चुनाव को लेकर राष्ट्रीय दलों के साथ अन्य किसी ने भी आमजन की बात नहीं की। जो सड़क लटकी हैं, वह क्यों लटकी हैं, इस पर सत्ता व विपक्ष ने चुप्पी साध रखी थी। वह, एक-दूसरे के आरोप-प्रत्यारोह से बाहर नहीं निकल पाए।