इन दिनों ताल के आसपास ढाई हेक्टेयर क्षेत्र में वज्रदंती के कई पौधे उगे हैं। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के ऊखीमठ रेंज के रेंजर पंकज ध्यानी ने बताया कि इस वर्ष फरवरी से मार्च तक देवरियाताल के चारों तरफ वन क्षेत्र का निरीक्षण किया गया था। वज्रदंती का उपयोग सूजन कम करने, सड़न रोकने, कान के संक्रमण, श्वास नलिका के संक्रमण, नाक और गले का संक्रमण रोकने में सहायक होता है।
केदारनाथ वन्य जीव विभाग की छोटी सी पहल से देवरियाताल ताल के आसपास का क्षेत्र वज्रदंती से महक रहा है। विभाग ने यहां ढाई हेक्टेयर क्षेत्र में वज्रदंती के बीज बोए और अब यहां वज्रदंती के पौधे उग गए हैं।
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समुद्रतल से 2438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देवरियाताल सालभर पानी से लबालब रहता है। इन दिनों ताल के आसपास ढाई हेक्टेयर क्षेत्र में वज्रदंती के कई पौधे उगे हैं। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के ऊखीमठ रेंज के रेंजर पंकज ध्यानी ने बताया कि इस वर्ष फरवरी से मार्च तक देवरियाताल के चारों तरफ वन क्षेत्र का निरीक्षण किया गया था। मई-जून में वज्रदंती के बीज बोए गए। अब ताल के चारों तरफ वज्रदंती के पौधे उगने के साथ ही फूल भी खिले हैं।
आयुर्वेद में होता वज्रदंती का उपयोग
वज्रदंती का वैज्ञानिक नाम बारलेरिया प्रियोनाइटिस है। वज्रदंती का सबसे अधिक उपयोग टूथपेस्ट में होता है। वज्रदंती का उपयोग सूजन कम करने, सड़न रोकने, कान के संक्रमण, श्वास नलिका के संक्रमण, नाक और गले का संक्रमण रोकने में सहायक होता है। वज्रदंती के डंठल, पत्ती, जड़ का उपयोग भी होता है। इसके इंटीसेप्टिक गुणों के कारण पौधे को हर्बल सौंदर्य प्रसाधन में शामिल किया जाता है।