उत्तराखंड बोर्ड में इंटरमीडिएट में प्रदेश में सातवें स्थान पर रहे गिरी गोविंद माई सरस्वती विद्या मंदिर बेलणी के छात्र दीपक भट्ट सिविल सेवा में करियर बनाना चाहते हैं। 10 किमी दूर से सुमाड़ी-तिलवाड़ा से विद्यालय आने वाले इस छात्र का कहना है कि सफलता के लिए कोई शार्टकट नहीं हो सकता है।
लक्ष्य निर्धारित और साफ होना चाहिए। उसे पाने के लिए कठिन परिश्रम जरूरी है। भौतिक विज्ञान में 99 अंक लाने वाले इस छात्र का कहना है कि मासिक टेस्ट में उसे इस विषय में 20 में 6 अंक मिले थे।
मायूस होने के बजाय अपनी कमियों को दूर किया और इसी विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए। छात्र ने अपनी उपलब्धि का श्रेय गुरुजनों और माता-पिता को दिया है। दीपक का कहना है कि घंटों पढ़ाई करने के बजाय सही समय और सही तरीके से पढ़ाई करनी चाहिए। दीपक के पिता उदयराम भट्ट जीआईसी कंडाली में अंग्रेजी के प्रवक्ता हैं। जबकि मां गृहणी हैं।
अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनना चाहते हैं अर्णव
इंटरमीडिएट में प्रदेश में 9 वां स्थान प्राप्त करने वाले अर्णव आर्यन बिष्ट अंतरिक्ष के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। शिक्षक बीरेंद्र सिंह बिष्ट और शिक्षिका लक्ष्मी बिष्ट की तीन संतानों में सबसे बड़े अर्णव का कहना है कि सभी विषयों को बारी-बारी से समय के साथ पढ़ाई करनी चाहिए। कठिन मेहनत और लक्ष्य निर्धारित होने से सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के नौकरी पर रहने से दादा-दादी से लगाव ज्यादा है। उनका कहना कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में आजादी के बाद देश ने एक नया मुकाम हासिल किया है। वे अपने स्तर से इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।
शिक्षिका बनना चाहती है अंजली
गुप्तकाशी। बीरेंद्र प्रसाद गोस्वामी और शांता गोस्वामी की बड़ी संतान अंजली गोस्वामी ने बालिका वर्ग में प्रदेश में इंटरमीडिएट में 21 वां स्थान प्राप्त किया है। छात्रा शिक्षिका के रूप में अपना करियर बनाना चाहती है। खंड शिक्षाधिकारी केएस राणा को अपना आदर्श मानते हुए वह भी एक मुकाम हासिल करना चाहती हैं। छात्रा का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र को बेहतर कर जरूरतमंदों को शिक्षा देना उनका उद्देश्य है।
प्रोफेसर बनना चाहती शिवानी
रुद्रप्रयाग। कक्षा 12वीं में प्रदेश स्तर पर15वीं रैंक हासिल करने वाली शिवानी पुरोहित प्रोफेसर बनना चाहती है। उनका कहना है कि जरूरी नहीं कि शहरों में रहकर ही अच्छी तालीम हासिल की जा सकती है। गांव में भी अच्छी शिक्षा ग्रहण की जा सकती है। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता पिता के सहयोग व गुरुजनों के बेहतर प्रयास को दिया।