तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट मंगलवार को परंपरानुसार शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं।
कपाट बंद होने पर भक्त उत्सव डोली के अपने पहले पड़ाव चोपता पहुंचे। सात नवंबर को भगवान तुंगनाथ की डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ पहुंचेगी। शीतकाल के छह माह वहीं पूजा-अर्चना होगी।
तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट मंगलवार को सुबह साढ़े दस बजे शुभ लग्नानुसार श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए गए। भगवान की डोली अपने प्रथम पड़ाव चोपता पहुंच गई है। चार नवंबर को डोली बणतोली पहुंचेगी। वहां 11 गांवों की ओर से शिव महापुराण महायज्ञ में शामिल होगी।
बणतोली में पहली बार डोली आगमन पर शिव महापुराण आयोजित किया जा रहा है। पांच नवंबर को यहां जलयात्रा का आयोजन भी किया जाएगा। छह नवंबर को महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद बाबा की डोली अपने अंतिम पड़ाव भनकुंड पहुंचेगी।
सात नवंबर को भगवान तुंगनाथ की डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचेगी। वहां पूजा-अर्चना के बाद भोग मूर्ति को गर्भ गृह में स्थापित किया जाएगा। इस मौके पर कार्याधिकारी अनिल शर्मा, प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार नौटियाल, मठापति राम प्रसाद मैठाणी, प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, पुजारी शंकर लिंग, गंगाधर लिंग, वेदपाठी विश्वमोहन जमलोकी, नवीन मैठाणी, जिला पंचायत सदस्य मीना पुंडीर, युद्धवीर पुष्पवाण, कुशाल सिंह नेगी, दिनेश मैठाणी आदि उपस्थित थे।
12,785 ने किए बाबा तुंगनाथ के दर्शन
ऊखीमठ। इस बार बाबा तुंगनाथ के दर्शनों के लिए पिछले वर्ष की अपेक्षा अधिक तीर्थयात्री पहुंचे। तुंगनाथ मंदिर के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कि इस बार 12785 तीर्थयात्रियों ने बाबा तुंगनाथ के दर्शन किए हैं।