मंदाकिनी नदी पर लगी ट्राली खराब होने के कारण अगस्त्यमुनि ब्लाक के चंद्रापुरी, नैली, कुंड, अरखुंड, कौशलपुर, डालसिंगी, क्यार्क, बरसूड़ी, नैली, पौंडार, पाली, रयांसू, बीरों, देवल, संगूर, भटवाड़ी, सुनार आदि गांवों के प्राथमिक व जूनियर कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र शनिवार को स्कूल नहीं पहुंच पाए। अन्य ग्रामीणों व नौकरीपेशा लोगों को अतिरिक्त फेर लगाकर रयांसू के रास्ते चंद्रापुरी व अगस्त्यमुनि पहुंचना पड़ा।
आपदा के बाद से ग्रामीणों की मुश्किलों को कम करने के उद्देश्य से लगाई गई ट्राली परेशानी का सबब बनी हुई है। आए दिन खराब होती ट्राली से अब तक कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। बावजूद शासन-प्रशासन और विभाग के कान में जूं नहीं रेंग रही है।
बीते शुक्रवार को दोपहर बाद दो बजे से खराब हुई ट्राली को लोनिवि ऊखीमठ डिवीजन द्वारा ठीक नहीं किए जाने के कारण शनिवार को गांवों के दौ सौ से अधिक बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाए। ये बच्चे काफी देर तक ट्राली ठीक होने का इंतजार करते रहे।
इस दौरान कुछ लोगों द्वारा विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों को फोन भी किया गया, लेकिन अधिकांश के मोबाइल ऑफ थे। ऐसे में इन बच्चों को मजबूरी में अपने घरों को वापस लौटना पड़ा। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट कक्षाओं के 40 से अधिक छात्र अतिरिक्त रास्तों से स्कूल पहुंचे।
ग्राम प्रधान सुलोचना देवी, ममता देवी, सुरेंद्र सिंह पंवार, दीपक पंवार, बीएम भट्ट, विश्वनाथ सिंह आदि का कहना था कि ट्राली से लगातार हो रहे हादसों के बाद भी विभाग सुध नहीं ले रहा है। उन्होंने एक सप्ताह में नई ट्राली लगाने और 15 अक्तूबर तक कच्चा पैदल पुल निर्माण की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। शाम चार बजे बताया गया कि ट्राली को ठीक कर दिया गया है।