राज्य निर्माण के 16 वर्ष बाद भी जिले के कई गांव सड़क सुविधा से वंचित हैं। इन गांवों को सड़क से जोड़ने की घोषणाएं धरातल पर नहीं उतरने से ग्रामीण आज भी दो से आठ किमी की एकतरफा पैदल दूरी नाप रहे हैं।
रुद्रप्रयाग जिले में अगस्त्यमुनि, जखोली और ऊखीमठ ब्लाक के 60 से अधिक गांव आज भी सड़क तक पहुंचने के लिए कई किमी पैदल दूरी नाप रहे हैं। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद केदारनाथ विधानसभा में नारायणकोटी-कोठेडा-देवशाल, क्यार्क-बरसूड़ी-भैंरो बैंड-जमेथी, जाबरी-पाटियूं-मुनासू-मोली, चंद्रापुरी-गुगुली, मस्ता-रिणकोट-कालीमठ, ग्वाड़-दिलमा-पाव-जगपुड़ा सहित 2 से 6 किमी तक के 16 मोटर मार्गों की स्वीकृति दी गई। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग नाला से देवशाल, ग्राम ताला बंगराली-ग्वाड सेम, स्वांरी-ग्वांस-मालखी सहित 10 नए मार्गों को भी स्वीकृति मिली। शासन स्तर से इन मार्गों के जीओ जारी होने के बावजूद निर्माण के लिए बजट उपलब्ध नहीं हो पाया है।
12 वर्ष से फाइलों में कैद सड़क
रुद्रप्रयाग। केदारघाटी के दूरस्थ तोषी गांव को सड़क से जोड़ने के लिए 2004 में एक प्रस्ताव तैयार किया गया था। वन विभाग व लोनिवि की ओर से चर्चा के बाद भी इस पर अमल नहीं हो पाया है। तोषी गांव के ग्रामीण आज भी रोजमर्रा की वस्तुओं की खरीद के लिए एकतरफा 8 किमी की पैदल त्रियुगीनारायण पहुंचते हैं। गौंडार गांव के ग्रामीण भी छह किमी की दूरी नाप रहे हैं।
मुख्यमंत्री की ओर से घोषित सड़कों का शासन स्तर पर जीओ के बाद भी निर्माण नहीं किया जा रहा है। हर बात में सरकार बजट का रोना रो रही है। जबकि जनता लगातार पूछ रही है।
- शैलारानी रावत, विधायक केदारनाथ विधानसभा
शासनादेश के बाद निर्माण की प्रक्रिया होती है। किस मद में निर्माण किया जाए, इसे लेकर वर्षवार का लक्ष्य तय कर घोषित योजनाओं के निर्माण के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जाती है।- इंद्रजीत बोस, ईई लोक निर्माण विभाग रुद्रप्रयाग