पट्टी बच्छणस्यूं के दस से अधिक गांवों को जोड़ने वाला फतेहपुर झूला पुल हादसों का सबब बन गया है। पुल में बिछी डामर उखड़ चुकी है। सुरागों को टिन की चादर से ढका गया है। इससे दुर्घटना का भय बना हुआ है।
सड़क सुविधा से वंचित मरगांव, पणधारा, कलेथ सहित दस से अधिक गांवों के ग्रामीण आज भी मीलों पैदल नाप रहे हैं। ये ग्रामीण फतेहपुर में बने झूला पुल से होकर पैदल रास्ते से खांकरा पहुंचते हैं, जहां से यातायात की सुविधा मिलती है। लेकिन झूला पुल की स्थिति दयनीय बनी हुई है।
करीब तीस मीटर लंबे पुल के दोनों तरफ के एंबेडमेंट जहां जर्जर हो रहे हैं वहीं, पुल पर बिछा डामर पूरी तरह से उखड़ चुका है, जिस कारण नीचे की तरफ बिछायी गई टिन और लोहे की पट्टियां जंक से गल चुकी हैं। लोक निर्माण विभाग द्वारा मरम्मत के बजाय ऊपर से टिन की चादरें बिछाई गई हैं, जो राहगीरों के लिए खतरा बनी हुई है। स्थानीय दिनेश रावत, दरमान सिंह, सोहन सिंह, कृपाल सिंह आदि का कहना है कि लोक निर्माण विभाग को कई बार अवगत कराने पर भी पुल की मरम्मत नहीं की जा रही है।
बीते वित्तीय वर्ष में फतेहपुर झूला पुल को शामिल किया गया था लेकिन धनराशि नहीं मिल पायी। इस बार प्राथमिकता के तौर पर इसे शामिल किया जा रहा है। इसे अलावा अगर अन्य मद में गुंजाइश हुई तो त्वरित गति से मरम्मत कर दी जाएगी।
- इंद्रजीत बोस, ईई लोनिवि प्रांतीय खंड रुद्रप्रयाग