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गमगीन माहौल में तीनों महिलाओं का संस्कार

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तिलवाड़ा स्थित सूर्याप्रयाग में जखोली की लुठियाग गांव की मृत तीन महिलाओं की गमगीन माहौल में की ग? - फोटो : RUDRAPRYAG
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जखोली ब्लॉक के चिरबटिया-लुठियाग गांव की मृत तीनों महिलाओं की सूर्यप्रयाग स्थित मंदाकिनी नदी किनारे गमगीन माहौल में अंत्येष्टि कर दी गई।
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शुक्रवार को जिला चिकित्सालय में सुबह 10 बजे से शवों का पोस्टमार्टम शुरू किया गया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने तीनों शव परिजनों को सौंपे। वाहन से शवों को तिलवाड़ा स्थित सूर्यप्रयाग लाया गया। वहां पर पहले से लुठियाण, चिरबटिया समेत ासपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे हुए थे। मंदाकिनी नदी किनारे तीनों महिलाओं की गमगीन माहौल में अंत्येष्टि कर दी गई। 10 वर्षीय रौनक ने अपनी माता आशा देवी की चिता को मुखाग्नि दी।
बृहस्पतिवार दोपहर बाद लुठियाग गांव की माला देवी, सोना देवी और आशा देवी अन्य महिलाओं के साथ घर की लिपाई-पुताई के लिए चिरबटिया से कुछ दूर मिट्टी लेने गईं थीं। ये तीनों महिलाएं मिट्टी खोद रही थीं जबकि अन्य महिलाएं खोदी गई मिट्टी को थैलों में भर रही थंी। अपराह्न लगभग तीन बजे खदान का ऊपरी हिस्सा टूटकर महिलाओं के ऊपर जा गिरा। मिट्टी में दबकर दर्दनाक मौत हो गई थी। जखोली व घनसाली तहसील प्रशासन, राजस्व पुलिस और रेगुलर पुलिस द्वारा आपदा प्रबंधन टीम और ग्रामीणों की मदद से शवों को खदान से बाहर निकाला गया। साथ ही जरूरी कार्रवाई के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए रात्रि 10.30 बजे जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग भेज दिया गया था।
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मां की चिता को एकटक देखता रहा रौनक
सूर्याप्रयाग में अपनी माता आशा देवी को मुखाग्नि देने के बाद 10 वर्षीय रौनक किनारे पर बैठक एकटक जलती चिता को देखता रहा। जब पूरी चिता जल गई तो फफक-फफक कर रोते हुए अपनी मां को आवाज देने लगा। यह देख वहां मौजूद अन्य लोगों की आंखें भी भर आईं। 40 वर्षीय आशा देवी की तीन संतानों में रौनक सबसे छोटा है और कक्षा सात में पढ़ता है। उसके पिता दिनेश सिंह ने बताया कि पत्नी की मौत का गम भुला पाना मुश्किल है। कभी कल्पना नहीं की थी यह दिन भी देखना पड़ेगा। उधर, गांव में आशा देवी की दोनों बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है।
लुठियाग में पसरा पड़ा मातम
बृहस्पतिवार रात लुठियाग-चिरबटिया में कोई परिवार नहीं सोया। प्रभावित परिवारों के साथ अन्य कई घरों में भी खाना नहीं बना। स्थिति यह रही कि छोटे बच्चों को दिन का बचा भोजन कराने के बाद उन्हें सुला दिया गया। बड़े-बुजुर्ग रातभर प्रभावित परिवारों के साथ रहे। ग्राम प्रधान दीपक कैंतुरा ने बताया कि इस घटना से पूरा गांव आहत है।
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कामकाज के लिए एक साथ जाती थीं तीनों महिलाएं
लुठियाग गांव की आशा देवी, सोना देवी और माला देवी, खूब मिलनसार थीं। साथ ही वह, खेतीबाड़ी, चारापत्ती, राशन लेने भी साथ-साथ जाती थीं। गांव में अन्य महिलाओं के साथ भी उनकी अच्छी बातचीत होती थी। किसी के सुख-दुख में शामिल होना उनकी सबसे बड़ी खूबी थी।
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