रुद्रपुर। होली में देसी रंग और गुलाल की धूम मचाने के लिए खटीमा के झनकट में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हर्बल रंग तैयार करने में जुटी हैं। गुलाब, पालक सहित अन्य प्राकृतिक तत्वों से तैयार अबीर और गुलाल न शरीर को नुकसान पहुंचाएंगे और न ही पर्यावरण की सेहत को बिगाड़ेंगे। महिलाएं हर्बल रंगों को तैयार करने के बाद विभिन्न जगहों पर स्टॉल लगाकर इन्हें बेचेंगी।
दरअसल होली में बाजार में बिकने वाले रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचता है। इसी वजह से लोगों ने रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से परहेज करना शुरू कर दिया है।
होली में बड़े पैमाने पर चीन से रंग, अन्य सामान मंगाए जाते हैं और सस्ता होने की वजह से लोग हाथोंहाथ लेते हैं। लेकिन कोरोना वायरस के चलते इस बार चीन से होली के रंग और अन्य सामान कम मात्रा में आ रहे हैं। वहीं, बाजार में बिकने वाले रासायनिक रंगों को टक्कर देने के लिए महिला शक्ति ग्राम संगठन झनकट के चार महिला समूह प्रिया, कामना, अशिका और पूज्जनीय समूह की महिलाएं हर्बल अबीर, गुलाल तैयार कर रही हैं।
महिलाएं पालक, गुलाब, टेसू के फूल, गेंदा, गुलाब, धनिया, चावल आदि से रंग तैयार कर रही हैं। समूह की महिलाएं अनुसुईया, अमरावती, सुशीला, परवीन, शारदा, मीना आदि कहती है कि हर्बल रंगों को लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इन रंगों से शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है और इनको बनाने में प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल होता है। उनको उम्मीद है कि जो रंग वो तैयार कर रहे हैं, इन रंगों की खुशबू काफी दूर तक फैलेगी और लोग इन्हें हाथोंहाथ लेंगे।
झनकट के चार महिला समूह की महिलाएं होली के लिए हर्बल अबीर गुलाल तैयार कर रही हैं, जो अच्छा प्रयास है। समूहों की ओर से तैयार रंगों की बिक्री विभिन्न जगहों पर स्टॉल लगाकर की जाएगी। विकास भवन, कलक्ट्रेट, विकासखंडों के साथ ही सरस मार्केट में भी इन रंगों को बिक्री के लिए रखा जाएगा। - हिमांशु जोशी, परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास विभाग।