तुंगनाथ घाटी के वन पंचायत मक्कूमठ व उषाड़ा का सीमा विवाद नहीं सुलझ पाया है। तहसील प्रशासन, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम ने दोनों वन पंचायत पदाधिकारियों व ग्रामीणों के साथ लंबी वार्ता की इसके बाद भी मामला नहीं सुलझ सका। अब इलेक्ट्रॉनिक ट्रेसिंग मशीन के जरिए सीमांकन किया जाएगा।
उप जिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा के निर्देश पर नायब तहसीलदार जयवीर राम बधाणी की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय समिति ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। बनियाकुंड में जहां पर दोनों वन पंचायतों की सीमा है उसका विस्तार से जायजा लिया। इस मौके पर केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के रेंजर ललित मोहन नेगी ने बताया कि गोपेश्वर-ऊखीमठ पैदल मार्ग के सीमा स्तंभ 54 के निचली तरफ से केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की सीमा शुरू होती है, जबकि प्रशासन के नक्शे में सीता स्तंभ 141 से राजस्व ग्राम बनियाकुंड की सीमा शुरू होती है। शेष भूभाग वन विभाग अगस्त्यमुनि रेंज के अंतर्गत आता है। इस मौके पर वन पंचायत उषाड़ा व मक्कू के पदाधिकारियों की प्रशासन व वन विभाग के अधिकारियों के साथ सीमांकन को लेकर काफी देर तक चर्चा होती रही, लेकिन मामला नहीं सुलझ पाया। इस पर निर्णय लिया गया कि अब इलेक्ट्रॉनिक ट्रेसिंग मशीन उपकरण के माध्यम से वन पंचायत का सीमांकन किया जाएगा। इस मौके जनप्रतिनिधियों के अलावा विभागीय एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।