सिद्धपीठ कालीमठ को जोड़ने वाला पैदल पुल हादसों को न्योता दे रहा है। पुल के दोनों तरफ जाली नहीं होने से दुर्घटना का खतरा बना है। ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने मंदिर में यात्री सुविधाओं की बेहतरी की मांग की है।
देवी भक्तों की आस्था का केंद्र सिद्धपीठ कालीमठ में यात्री सुविधाएं दम तोड़ रही हैं। गुप्तकाशी-कालीमठ-कोटमा मोटर मार्ग से मंदिर को जोड़ने के लिए काली नदी पर निर्मित पुल के दोनों तरफ जाली नहीं है, जिससे यहां कभी भी किसी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता है। गार्डरों के बीच लोहे की पट्टियां लगाई गई हैं, लेकिन पट्टियों के बीच डेढ़ से दो फीट जगह खाली होने से गिरने का खतरा बना हुआ है। मंदिर के ठीक नीचे नदी किनारे घाट में भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। यहां श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन नदी का बहाव तेज होने से दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। मंदिर के मठापति अव्वल सिंह राणा, कुलदीप सिंह राणा, पूर्व ग्राम प्रधान गीता राणा और सामाजिक कार्यकर्ता ओमप्रकाश भट्ट आदि का कहना है कि जून 2013 की आपदा में कालीमठ में व्यापक नुकसान हुआ था। तब, पुल ध्वस्त हो गया था, जिसका बीएसएफ ने पुनर्निर्माण किया, लेकिन शासन, प्रशासन द्वारा आज तक यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। उन्होंने मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा, संचार, बिजली, पेयजल व शौचालय की पर्याप्त इंतजाम की मांग की है। बीकेटीसी के कालीमठ मंदिर प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कि सिद्धपीठ में यात्री सुविधाओं की बेहतरी व सुरक्षा के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बोर्ड की आगामी बैठक में इन विषयों पर चर्चा के साथ कार्ययोजना भी प्रस्तुत की जाएगी।