शिक्षिकाओं के अभाव में छात्राओं की संख्या हो रही कम
अगस्त्यमुनि। ब्लॉक मुख्यालय के बालिका इंटर कॉलेज में छह वर्ष से प्रधानाचार्या का पद खाली पड़ा है। प्रवक्ता संवर्ग में नौ पदों के सापेक्ष सात पद खाली पड़े हैं और एक अन्य के स्थानांतरण के आदेश जारी हो चुके हैं। सहायक संवर्ग में भी चार पद खाली पड़े हैं, जिससे पठन-पाठन अतिथि शिक्षिकाओं के भरोसे चल रहा है। वर्तमान शिक्षण सत्र में विद्यालय में शिक्षिकाओं के अभाव में यहां छात्राओं की संख्या 209 से घटकर 193 हो गई है।
जीजीआईसी में प्रवक्ता संवर्ग में राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी विषय, जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान के पद खाली हैं, जबकि गृह विज्ञान में तैनात प्रवक्ता (प्रभारी प्रधानाचार्या) के स्थानांतरण के आदेश जारी हो चुके हैं। सहायक संवर्ग में भी यहां गणित, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी और व्यायाम विषय के पद लंबे समय से खाली हैं।
विद्यालय में प्रधानाचार्या सहित प्रवक्ता व एलटी के 11 पद खाली हैं। शिक्षिकाओं के कमी के चलते बीते एक पखवाड़े में ही 16 छात्राएं अपना टीसी निकालकर अन्यत्र प्रवेश ले चुकी हैं। शिक्षक-अभिभावक संघ के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह और विद्यालय प्रबंधन समिति की अध्यक्ष बीना कंडारी का कहना है कि एक तरफ सरकार बालिकाओं को पढ़ाने की बात कर रही है, तो दूसरी ओर संस्थानों के प्रति उदासीन रवैया अपनाया जा रहा है।
जीआईसी अगस्त्यमुनि को कागजों में सुगम श्रेणी का विद्यालय चिह्नित किया गया है, लेकिन प्रधानाचार्या, प्रवक्ता व एलटी संवर्ग मिलाकर कुल 12 पद खाली पड़े हैं। इधर, मुख्य शिक्षाधिकारी प्रमेंद्र कुमार बिष्ट ने बताया कि काउंसलिंग के तहत प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर पर स्थानांतरण हुए हैं, जिसके तहत कई पदों पर प्रतिस्थानी भी आ चुके हैं। जीजीआईसी में रिक्त पदों को लेकर निदेशालय व शासन को अवगत कराया गया है।