शनिवार को प्रात: 7 बजे से साणेश्वर महाराज के प्राचीन मंदिर में भगवान साणेश्वर और क्षेत्रपाल देवता की पूजा-अर्चना शुरू की गई। पंडित केशवानंद पुरोहित, माहेश्वर पुरोहित, अरविंद पुरोहित, विशंभर नौटियाल ने सिद्धमंत्र और अन्य पूजा संपादित की।
इस मौके पर सिल्ला गांव आराध्य देवता के जयकारों से गूंज उठा। यहां पर विशेष पूजा के बाद ढोल-दमाऊं के साथ देव नृत्य का आयोजन किया गया। दोपहर एक बजे विधि-विधान के साथ भगवान साणेश्वर की डोली को मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाया गया। इसके बाद सिल्ला देवल और डुंगरा मोहल्ले से भगवान साणेश्वर की दिवारा यात्रा शुरू की गई। इस मौके पर भारी संख्या में देवभक्तों ने आराध्य के दर्शन कर मनौती मांगी।
भगवान साणेश्वर महाराज की दिवारा यात्रा रात्रि प्रवास के लिए सिल्ला ब्राह्मण गांव पहुंची। यहां पर ग्रामीणों ने डोली का भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर बाल व्यास अरविंद पुरोहित, अनसूया प्रसाद नौटियाल, वीरपाल सिंह रावत, वीर सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह, पूर्व प्रधान अनसूया पुरोहित, देवेश नौटियाल, मेधनीधर पुरोहित, सुदर्शन, हर्ष प्रीतम सहित अन्य ग्रामीण मौजूद थे।