चारधाम विकास परियोजना के प्रभावितों को मुआवजा, मार्केटिंग कांपलेक्स समेत अन्य मांगों के निराकरण की मांग को लेकर संघर्ष समिति के आह्वान पर जनपद बंद रहा। समिति से जुड़े लोगों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। साथ ही जल्द मांगें पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। वहीं, बाजार बंद की वजह से लोगों को दिनभर चाय भी नसीब नहीं हो पाया।
शनिवार को प्रभावितों के हितों की मांग को लेकर संघर्ष समिति के आह्वान पर रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, भीरी, चंद्रापुरी, गुप्तकाशी, फाटा, सुमाड़ी, खांकरा, नरकोटा, रतूड़ा, नगरासू समेत अन्य सभी छोटे बाजार बंद रहे। समिति से जुड़े लोगों ने सरकार पर उनकी रोजी-रोटी छीनने का आरोप लगाया। समिति के अध्यक्ष मोहित डिमरी ने कहा कि चारधाम विकास परियोजना के तहत बदरीनाथ और गौरीकुंड हाईवे का चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। वे शुरू से परियोजना के समर्थन में रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग, परिवहन मंत्रालय और केंद्र व राज्य सरकार प्रभावित भवन स्वामियों एवं व्यापारियों को समुचित राहत नहीं दे रहा है। मामले में बीते वर्ष मुख्यमंत्री से भेंटकर उन्हें स्थिति से अवगत कराया गया था, लेकिन आज तक समस्या हल नहीं हो पाई है। प्रभावितों ने सरकारी भूमि पर बने मकानों-दुकानों को तोड़ने पर क्षतिपूर्ति की मांग की, लेकिन शपथपत्र मांगकर प्रभावितों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
जन अधिकार मंच के संरक्षक रमेश पहाड़ी, देवेंद्र चमोली, एमएन भट्ट ने कहा कि पहाड़ के लोगों के कठिन परिश्रम से आज चारधाम यात्रा को नया मुकाम मिल रहा है, लेकिन सरकार अब यहां के लोगों को उजाड़ने का काम कर रही है। उद्योग व्यापार संघ के प्रदेश महामंत्री प्रदीप बगवाड़ी और प्रदेश उपाध्यक्ष माधो सिंह नेगी ने कहा कि परियोजना से प्रभावित हो रहे प्रत्येक व्यापारी को दस लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। तिलवाड़ा व्यापार सभा अध्यक्ष सुरेंद्र दत्त सकलानी ने कहा कि तिलवाड़ा बाजार में भी अन्य बाजारों की तर्ज पर 12 मीटर चौड़ीकरण होना चाहिए। बुद्धि बल्लभ ममगाईं ने कहा कि खांकरा में तीसरे पुल को निरस्त करने की मांग की। आंदोलनकारियों ने सीएम को समस्याओं का मांगपत्र भी भेजा। प्रदर्शनकारियों में जोत सिंह बिष्ट, अशोक चौधरी, केपी ढौडियाल, कांता नौटियाल, महावीर भट्ट, नरेंद्र बिष्ट समेत कई शामिल थे।