जखोली विकासखंड के राजकीय इंटर कालेज तिमली-बड़मा को सरकारी दर्जा मिलने के चार वर्ष बाद भी विज्ञान वर्ग में मान्यता नहीं मिल पाई है। विज्ञान वर्ग के छात्र-छात्राओं को अगस्त्यमुनि और सिद्धसौड़ की दौड़ लगानी पड़ रही है।
बड़मा क्षेत्र के डोभल्या, सेम, कोटी, स्वाड़ा, मरोड़ा जखन्यालगांव, नौगांव, उतर्सू, तल्ला किरोड़ा सहित दर्जनभर से अधिक गांवों के बच्चे जीआईसी बड़मा में पढ़ने आते हैं। वर्ष 2012 में विद्यालय के प्रांतीयकरण हुआ, लेकिन हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में साइंस विषय नहीं होने से छात्र-छात्राओं को खासी दिक्कतें हो रही हैं।
8वीं के बाद इन गांवों के करीब 100 छात्र-छात्राएं विज्ञान की पढ़ाई के लिए पिछले कई वर्षो से छह किमी दूर जीआईसी अगस्त्यमुनि व 8 किमी की चढ़ाई पार कर जीआईसी सिद्धसौड़ जा रहे हैं। क्षेत्र के केसी रावत, राजेंद्र सिंह, एमडी मैठाणी आदि का कहना है कि विज्ञान मान्यता नहीं होने से गांव के कई होनहार गरीब छात्र व बालिकाओं की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हो रही है।
इनका कहना है -
विज्ञान की मान्यता को लेकर शासन स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है। अगले सत्र में हाईस्कूल स्तर पर विज्ञान वर्ग की कक्षाओं की मान्यता मिल जाएगी। रिक्त पदों की पूर्ति शासन स्तर से होनी है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
-एलएस दानू, डीईओ, माध्यमिक, रुद्रप्रयाग