आपदा के बाद से केदारघाटी के रेल गांव के ग्रामीणों का पुल का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। तब, से ग्रामीण व स्कूली बच्चे ट्राली के सहारे आवाजाही को मजबूर हैं, लेकिन सरकारी तंत्र ने गांव की सुध नहीं ली।
16/17 जून 2013 की आपदा में मंदाकिनी नदी पर बने आठ झूला पुल सैलाब में बह गए थे, जिसमें रेल गांव को जोड़ने वाला पुल भी शामिल है। बीते वर्षों में अन्य छह पुलों का निर्माण हो चुका है, लेकिन रेल गांव का इंतजार खत्म नहीं हुआ। आपदा के बाद से गांव के 15 से अधिक परिवार मंदाकिनी नदी पर लगी जर्जर ट्राली से आवागमन कर रहे हैं। इस ट्राली की भी मरम्मत नहीं हो रही है, जिससे दो वर्ष पूर्व गांव की एक युवती फाटा से घर जाते समय नदी में गिर गई थी। बावजूद सरकारी तंत्र ने कोई सुध नहीं ली। ग्राम प्रधान रामेश्वर प्रसाद जमलोकी, फते सिंह, मोहन सिंह, शासन, प्रशासन व लोक विभाग को अवगत कराने पर भी मामले के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई दी। अधिशासी अभियंता, लोनिवि ऊखीमठ मनोज दास का कहना है कि रेल गांव के लिए मंदाकिनी नदी पर पुल का निर्माण जोरों पर चल रहा है। एक पखवाड़े के भीतर पुल को जोड़ने का कार्य पूरा हो जाएगा। इसके बाद जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए इसे आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा।