पर्यटन, तीर्थाटन के नाम पर हिमालय की वादियों तक पहुंच रहा प्लास्टिक कचरा शुभ नहीं है। बुग्यालों में फैले चॉकलेट, टॉफी के रैपर, खाली प्लास्टिक बोतलें हिमालय की सेहत के साथ मानवीय जीवन के लिए बड़ा खतरा साबित हो रही हैं।
केदारनाथ यात्रा के दो माह में ही गौरीकुंड से केदारनाथ तक 25 क्विंटल प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया जा चुका है। डेढ़ माह से केदारपुरी क्षेत्र में निरंतर सफाई अभियान चल रहा है, लेकिन मंदाकिनी व सरस्वती नदी किनारे प्लास्टिक कचरा मिल ही रहा। यही नहीं, केदारनाथ से आठ किमी ऊपर वासुकीताल से भी हजारों की संख्या में टॉफी, चॉकलेट, बिस्कुट, बोतल बंद पानी का कचरा एकत्रित किया जा चुका है। चोपता के बुग्याल से तुंगनाथ, चंद्रशिला तक 334 किलो किलो और रुद्रनाथ में 219 किलो प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया गया है। गढ़वाल विवि के उच्च शिखरीय शोध संस्था के निदेशक डा. एमसी नौटियाल और पर्यावरण विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. आरसी शर्मा का कहना है कि प्लास्टिक कचरा मिट्टी में पानी को रोकता है, जो भूस्खलन का कारण बनता है। चोपता से चंद्रशिला तक एक वर्ष में 22262, तो रुद्रनाथ पैदल मार्ग पर 16196 प्लास्टिक की बोतल एकत्र की गई। हालांकि नगर पालिका रुद्रप्रयाग ने जैविक व अजैविक कूड़े को अपनी आय का जरिया बनाया है। बीते तीन वर्षों में नगर पालिका किश्तों में लगभग सात लाख का अजैविक कूड़ा बेच चुकी है।