शनिवार को गांव में मातम पसरा रहा। ग्रामीण जहां बेटियों की सलामती के लिए इष्ट-पित्रों का पुकार रहे हैं, वहीं प्रभावित परिवारों को हरसंभव ढाढ़स बंधाने का प्रयास भी कर रहे हैं। जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी पैदल दूरी पर स्थित पावौ गांव का माहौल दो दिन से गमगीन है।
एक दिन में दो अलग-अलग घटनाओं से वे परेशान हैं। आग से झुलसी दो युवतियों शशि व कमला देहरादून और कमला का बेस अस्पताल श्रीनगर में इलाज चल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार हालात खतरे से बाहर हैं। पूरा गांव बेटियों के जल्द ठीक होने की दुआ कर रहा है। गांव के रणजीत सिंह और राजेंद्र सिंह का कहना है कि बेटियों की इस स्थिति से सभी बेहाल हैं। जैसे भी हो, उनकी जान बच जाए।
रणजीत सिंह कहते हैं घास के लिए कई अन्य बेटियां/महिलाएं कुछ भी कहने से डर रही है। इधर, रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओ राजीव धीमान ने बताया कि पीड़ित युवतियों के इलाज के लिए विभागीय स्तर पर हरसंभव मदद की जाएगी।
गांव में पसरा मातम
रुद्रप्रयाग। पावौ गांव निवासी व ऋषिकेश में वाहन चालक के तौर पर कार्य रहे बबली सिंह (32) की शनिवार रात को अचानक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उसने पेट दर्द की शिकायत की थी। जब तक कुछ संभल पाते, तब तक व दम तोड़ चुका था।