जखोली ब्लाक के भरदार पट्टी के 12 ग्राम पंचायतों के लिए एक दशक पहले 12 करोड़ 96 लाख रुपये में जवाड़ी-रौठिया पेयजल लाइन स्वीकृत की गई। धनराशि खर्च होने के बाद भी योजना का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।
सिलगढ़ पट्टी के 12 ग्राम पंचायतों के लिए 6 करोड़ 23 लाख रुपये की तैला-सिलगढ़ योजना भी छह वर्ष से पूरा होने की राह देख रही है। कार्यदायी संस्था जलनिगम की 38 छोटी-बड़ी पेयजल लाइनें वर्षों से अधर में हैं।
जिला पंचायत सदस्य आशा डिमरी का कहना है कि कई बार अवगत कराने के बाद भी जवाड़ी-रौंठिया योजना की सुध नहीं ली जा रही है। तिलवाड़ा के पूर्व व्यापार संघ अध्यक्ष मान सिंह जगवाण का कहना है कि विभाग की लापरवाही से लोग बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं।
पेयजल संकटग्रस्त गांव
जवाड़ी, रौंठिया, तैला, क्वीलाखाल, चाका, फलाटी, शीशौ, कंडाली, जैली, बंदरतोली, हाट, कुमड़ी, मूसढुंग, जखनोली, वाड, धारकोट, तिलवाड़ा बाजार, सुमाड़ी, रौठिया, जवाड़ी, नागपुर तल्ला क्षेत्र, पट्टी बच्छणस्यूं के गहड़, दानकोट, नौना, खाल्यू, पणधारा, सुनाऊं, कलेथ, बंगोली, निषणी सहित जिले में 90 से अधिक गांवों में भारी पेयजल संकट है।
यहां लगता है हैंडपंप पर ताला..
जिला मुख्यालय से करीब 8 किमी की दूरी पर स्थित रौंठिया गांव में पानी की समस्या कम नहीं है। ढाई सौ परिवारों वाले गांव के लोग बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। गांव के गागड़ तोक में जलसंस्थान ने पांच वर्ष पहले हैंडपंप लगाया। इस हैंडपंप से पानी बर्बाद न हो इसके लिए ग्रामीणों ने ताला लगाया रहता है। ग्रामीण सुबह और शाम हैंडपंप का ताला खोलकर एक-एक बर्तन पानी भरते हैं।
पानी बना पलायन का कारण .
जखोली ब्लाक का क्वीलाखाल गांव पानी के अभाव में खाली होने के कगार पर है। नब्बे के दशक में 120 परिवारों वाले गांव में सिर्फ 30 परिवार रह गए हैं, जिसमें 76 लोग हैं। इनमें अधिकांश 74 से 80 वर्ष की वृद्धाएं हैं। पीने के पानी के लिए ढाई किमी दूर तलपंदेरा की दौड़ लगानी पड़ रही है। विवाह व अन्य कार्यो में ग्रामीण मजदूरी में पानी मंगाते हैं।
अधिकांश पेयजल योजनाओं का निर्माण अंतिम चरण में है। कुछ योजनाओं पर विवाद होने से उनके निस्तरण के प्रयास हो रहे हैं। जवाड़ी-रौंठिया पेयजल लाइन का कार्य में स्वीकृत धन खर्च होने के कारण इन दिनों बंद है। शासन को 10 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट भेजा गया है।
--- एसके बरनवाल, ईई जलनिगम रुद्रप्रयाग