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ओंकारेश्वर मंदिर परिसर मरम्मत के अभाव में जर्जर

Mon, 29 Feb 2016 10:03 PM IST
ऊखीमठ
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शीतकालीन गद्दीस्थल के नाम से विख्यात ओंकारेश्वर मंदिर परिसर सरकार व मंदिर समिति की उपेक्षा से जर्जर हो रहा है। शीतकालीन गद्दीस्थल के भवन की दीवारें क्षतिग्रस्त होकर तिरछी हो गई हैं। मंदिर परिसर में स्थित अन्य छोटे-छोटे मंदिर भी जीर्णशीर्ण बने हुए हैं।
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वर्षभर यात्रा संचालन के लिए वर्ष 2014 में सरकार ने शीतकाल में बाबा केदारनाथ व मद्महेश्वर के दर्शन ओंकारेश्वर मंदिर में करवाने का निर्णय लिया गया था। बावजूद इसके मंदिर के सुंदरीकरण और मरम्मत के लिए कोई कदम नहीं उठाया। मंदिर परिसर में स्थित पंचकेदार गद्दीस्थल, ऊषा-अनिरुद्ध विवाह स्थल, चंडिका मंदिर की दीवारें भी क्षतिग्रस्त होकर तिरछी हो गई हैं। इसके साथ ही मंदिर परिसर में स्थित मद्महेश्वर सभा मंडप, वाराही मंदिर, भैरवनाथ मंदिर, पंच केदार लिंग स्थल, एवं भोग मंडी की स्थिति भी जर्जर बनी हुई है। वहीं ओंकारेश्वर मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार भी दस वर्षों से अधूरा है।
पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट का कहना है कि सरकार व समिति की उपेक्षा से मंदिर व मंदिर परिसर की स्थिति दयनीय हो गई है। वहीं पूर्व विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान केदारनाथ मंदिर पर केंद्रित है। अन्य मठ-मंदिरों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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इधर, बीकेटीसी के कार्याधिकारी अनिल शर्मा ने बताया कि ओंकारेश्वर मंदिर व परिसर की मेंटिनेंस के लिए प्रपोजल शासन व दानदाताओं को दिया गया है। संभवत: अप्रैल से इसका सुधार शुरू हो जाएगा।
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