रुद्रप्रयाग। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में आरक्षण के चलते दस ग्राम पंचायतों में प्रधान ही नहीं हैं, जिससे विकास कार्यों के साथ ग्रामीणों के अन्य जरूरी प्रमाण पत्र व भूमि संबंधित कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
ग्राम पंचायत पाटा, कपणिया, कांडा व कोटी, गुप्तकाशी, रविग्राम, गिरिया, जालतल्ला, न्यालसू और सांकरी में वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जिला निर्वाचन विभाग द्वारा ग्राम प्रधान का पद एससी महिला, एसटी महिला/पुरूष व पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया था, लेकिन इन ग्राम पंचायतों में इस जाति का मूल निवासी नहीं होने से कोई नामांकन नहीं हो पाया। अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नौ माह बीतने के बाद भी उनकी ग्राम पंचायतों में प्रधान का चयन नहीं हो पाया है। इन हालातों में मनरेगा समेत कई योजनाओं का कार्य प्रभावित हो रहा है। जिला पंचायत राज अधिकारी चमन सिंह राठौर का कहना है कि त्रिस्तरीय पंचायतों में आरक्षण के मुताबिक उम्मीदवार नहीं मिलने से जिले में दस ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान का चयन नहीं हो पाया था। यहां प्रशासक नियुक्त किए गए हैं। आरक्षण में बदलाव करते हुए छह माह के भीतर उपचुनाव के जरिए प्रधान का चुनाव कर दिया जाएगा।