प्रशांत कुमार, सहायक श्रमायुक्त।
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रुद्रपुर। मंजिलें उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। ये लाइनें श्रम विभाग में सहायक श्रमायुक्त पद पर तैनात प्रशांत कुुमार पर सटीक बैठती हैं। प्रशांत ने 10वीं में 53 प्रतिशत और 12वीं कक्षा में 55 प्रतिशत अंक लाने के बावजूद निराशा को हावी नहीं होने दिया। उन्होंने मेहनत कर पहली बार में ही पीसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। आज वह सहायक श्रमायुक्त पद पर तैनात होकर श्रमिकों को न्याय देने का कार्य कर रहे हैं।
काशीपुर के आवास विकास निवासी और रुद्रपुर श्रम विभाग में सहायक श्रमायुक्त के पद पर तैनात प्रशांत कुमार ने उन छात्र-छात्राओं और परिजनों से संयम रखने की अपील की है जो कम अंक आने पर काफी हताश हो जाते हैं। प्रशांत ने बताया कि उन्होंने क्षेत्र के ही तुला राम राजा राम सरस्वती विद्यालय में 12वीं तक पढ़ाई की। वर्ष 2000 में दसवीं कक्षा में 53 प्रतिशत अंक लाकर उन्होंने 11वीं कक्षा में प्रवेश किया। उसके बाद वर्ष 2002 में उन्होंने 12वीं कक्षा में मात्र 55 प्रतिशत अंक हासिल किए।
बताया कि उनकी मंजिल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं बल्कि सिविल सर्विस का पेपर निकालना था। वर्ष 2006 में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग से डिप्लोमा कर करीब 10 साल प्राइवेट सेक्टर में नौकरी की। प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने के साथ-साथ उन्होंने खाली समय का सदुपयोग कर सिविल सर्विस की परीक्षा के लिए पढ़ाई की।
उन्होंने बताया कि पहली बार में ही उन्होंने पीसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। इसके बाद उनकी नौकरी वर्ष 2017 में हरिद्वार श्रम विभाग में सहायक श्रमायुक्त के पद पर लगी। वर्तमान में प्रशांत ऊधमसिंह नगर श्रम विभाग में सहायक श्रमायुक्त के पद पर तैनात हैं। उनका कहना है कि एक बार कम अंक आने से निराश होने की जरूरत नहीं है। कम अंक नहीं बल्कि मेहनत ही मंजिलों को तय करती है।
सोशल मीडिया के माध्यम से भी छात्र-छात्राओं को देते हैं टिप्स
रुद्रपुर। सहायक श्रमायुक्त प्रशांत कुमार ने बताया कि वह खाली समय में क्षेत्र के ही युवाओं को सिविल सर्विस की पढ़ाई के टिप्स भी देते हैं। इसके साथ ही फोन के माध्यम से भी छात्र-छात्राएं उनसे प्रश्नों के उत्तर पूछते हैं। उनका कहना है कि मेहनत करने वाला एक दिन जरूर कामयाब होता है, बस इसके लिए धैर्य रखने की जरूरत होती है। कम अंक आने पर आवेश में कदम नहीं उठाना चाहिए।