द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट शीतकाल के लिए आज बृहस्पतिवार पूर्वाह्न 11 बजे बंद कर दिए जाएंगे। इसी दिन बाबा की चल विग्रह उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करते हुए अपने पहले पड़ाव गौंडार गांव में रात्रि प्रवास करेगी। 24 नवंबर को डोली छह माह की शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होगी। मंदिर समिति द्वारा मंदिर की साज सज्जा के साथ अन्य तैयारियां जोरों पर की जा रही हैं।
बृहस्पतिवार सुबह छह बजे से ही मंदिर में बाबा मद्महेश्वर की पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी। मुख्य पुजारी द्वारा आराध्य का श्रृंगार कर भोग लगाया जाएगा। सभी धार्मिक औपचारिकताओं को पूरा करते हुए सुबह आठ बजे मंदिर के गर्भगृह में स्थापित स्वयंभू लिंग को समाधि रूप देकर विशेष पूजा एवं आरती की जाएगी। इसके बाद द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्तियों को चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान किया जाएगा। धाम से विदा होने से पूर्व आराध्य द्वारा अपने पात्रों का निरीक्षण करते हुए मंदिर की तीन परिक्रमा की जाएंगी। इसके बाद हक-हकूकधारियों की मौजूदगी में विधि-विधान व बाबा के आह्वान के साथ पूर्वाह्न 11 बजे मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। धाम से बाबा की डोली भक्तों के साथ शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करते हुए दोपहर बाद पहले पड़ाव गौंडार गांव पहुंचेगी। 22 को डोली रांसी और 23 को गिरिया गांव में रात्रि प्रवास करेगी। 24 नवंबर को डोली शीतकालीन प्रवास ओंकारेश्वर मंदिर में छह माह की पूजा के लिए विराजमान हो जाएगी। आराध्य के आगमन पर 23 नवंबर से ऊखीमठ में तीन दिवसीय मद्महेश्वर मेला भी शुरू हो रहा है, जिसकी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।