कुंड-ऊखीमठ-चोपता-गोपेश्वर राजमार्ग पर खुरपी और फावड़ा से बर्फ साफ करते हुए एनएच के मजदूर।
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चमोली और रुद्रप्रयाग जनपद के साठ से अधिक गांवों के साथ ही चोपता और तृतीय केदार तुंगनाथ को जोड़ने वाले कुंड-ऊखीमठ-चोपता-मंडल-गोपेश्वर हाईवे का 24 किमी क्षेत्र बर्फ से ढका है। यहां नवंबर से मार्च मध्य तक बर्फ और पाला का प्रकोप बना रहता है, जिससे अधिकांश समय यातायात प्रभावित होता है। इन दिनों 15 मजदूर गैंती, फावड़ा से जगह-जगह पर सड़क पर जमा बर्फ की पतली परत को तोड़कर मार्ग खोलने में जुटे हैं।
कुंड-ऊखीमठ-चोपता-गोपेश्वर हाईवे का पोथीबासा से चोपता और चोपता से कांचुला खर्क से काफी आगे लगभग 24 किमी क्षेत्र बर्फ के चलते अतिसंवेदनशील है। इसी क्षेत्र में दुगलबिट्टा, बनियाकुंड और चोपता है। इन दिनों भी यहां दो फीट तक बर्फ जमी है। पाला प्रभावित क्षेत्रों में इन दिनों 15 मजदूर गैंती-फावड़ा से बर्फ हटा रहे हैं। कई जगह नमक डालकर उसे पिघलाया जा रहा है। लेकिन इन मजदूरों के पास ठंड से बचने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
ग्राम पंचायत दैड़ा के ग्राम प्रधान देवेंद्र सिंह नेगी, चोपता के व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र मैठाणी ने बताया कि चोपता क्षेत्र में बारामास पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है, जबकि शीतकाल में अक्तूबर से मार्च तक सबसे अधिक पर्यटक पहुंचते हैं। लेकिन हाईवे पर बर्फ के चलते उन्हें दिक्कत होती है। बावजूद, एनएच द्वारा यहां सड़क पर जमी बर्फ को त्वरित साफ करने के इंतजाम नहीं हैं। इधर, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड लोनिवि के कनिष्ठ अभियंता अखिलेश तिवारी ने बताया कि स्नो कटर व जेसीबी से बर्फ की मोटी परत तो साफ हो सकती है, लेकिन सड़क की सतह से जमी बर्फ साफ करने में दिक्कत होती है। इसलिए नमक का प्रयोग कर उसे गैती, फावड़े से ही साफ करना होता है।