24 अप्रैल से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा ने आपदा के बाद दो वर्ष के सूने को खत्म सा कर दिया है। यात्रा पड़ाव और पैदल रास्ता गुलजार हो रहा है। एक सप्ताह में यात्रियों की संख्या बढ़ी है। हालांकि पैदल रास्ते के पड़ावों पर अब भी जरूरी व्यवस्थाएं नहीं जुट पाई हैं।
जंगलचट्टी में अब भी ठहरने की व्यवस्था नहीं हैं। भीमबली में सिर्फ 50, लिनचौली में करीब पांच सौ और धाम में सात सौ से आठ सौ लोगों के ठहरने की व्यवस्था हो पाई है। एक हफ्ते में पैदल रास्ते से यात्रियों की संख्या सात-आठ सौ से बढ़कर डेढ़ हजार तक पहुंच गई है।
यात्रियों की बढ़ती संख्या के बावजूद ठहरने के इंतजाम नहीं बढ़ाए नहीं गए हैं। रामबाड़ा से लिनचौली तक सबसे कठिन चढ़ाई वाले रास्ते पर पेयजल सुविधा नहीं है।
अब भी गिनती की दुकानें
16 किमी पैदल केदारनाथ यात्रा मार्ग पर जिला प्रशासन की ओर से सिर्फ 30 दुकानें आवंटित की गई हैं। पहले माह तक 21 दुकानें खोलने की अनुमति दी गई थी, लेकिन बमुश्किल 6 से 8 दुकानें ही खुली हैं।
खतरा बरकरार
गौरीकुंड से केदारनाथ के बीच पैदल रास्ते पर जहां शुरू के तीन मीटर मार्ग पर पहाड़ी से पत्थर गिरने और पानी रिसने से कीचड़ से फिसलन का खतरा बना है। लिनचौली से धाम तक बर्फ के बीच आवाजाही मुश्किलें पैदा कर रही है।
इनका है कहना
यात्रा बढ़ने के साथ ही भीमबली और लिनचौली में ठहरने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है। पेयजल व्यवस्था के लिए जलसंस्थान को निर्देश दिए गए हैं।
-सुनील कुमार, केदारनाथ यात्रा नोडल अधिकारी