बाबा केदारनाथप के के दर्शन को पहुंचे श्रद्धालु
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सोमवार को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर उमड़े भक्तों का उल्लास देखते ही बन रहा था। दिनभर केदारधाम बाबा के जयकारों से गूंजता रहा। केदारपुरी में अंधेरा छंटने के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती रही। सुबह पांच 5 बजे से श्रद्धालु मंदिर में पहुंचने लगे थे।
कपाट खुलने की शुभ घड़ी के समीप आते ही भक्तों की भीड़ मंदिर से मुख्य रास्ते तक दो सौ मीटर तक पहुंच गई थी। बाबा केदार के जयकारों से केदारपुरी दिन भर गुंजायमान रही। हल्की ठिठुरन के बीच सुबह सात बजे रावल भीमाशंकर लिंग ने मंदिर के कपाट खोले तो आस्था का उल्लास आसमान छूने लगा।
पिछले 31 वर्ष से कपाट खुलने पर धाम पहुंच रहे कालिका प्रसाद सेमवाल कहते हैं कि पहले दिन आराध्य के दर्शन की जो अनुभूति होती है, उसे बयां नहीं किया जा सकता। झारखंड के वीरेंद्र प्रसाद भी 14 वर्ष से निरंतर धाम पहुंच रहे हैं। शारीरिक रूप से असक्षम होने के बावजूद वह सपरिवार 8 बजे तक दर्शन कर पुण्य अर्जित कर चुके थे।
उनका कहना था आपदा के बाद इस वर्ष यात्रा अपना एक नया मुकाम हासिल करेगी। उन्होंने शासन व प्रशासन से यात्रा को और बेहतर और सुव्यवस्थित करने के लिए पुख्ता इंतजाम करने की सलाह भी दी।
मध्य हिमालय में बर्फ न होना गंभीर चिंता
केदारनाथ। हैदराबाद से पिछले छह वर्षों से लगातार बाबा केदार के दर्शनों को पहुंच रही आईटी छात्रा प्रियंका का कहना है वर्ष 2014 व 2015 में केदारनाथ में 9 से 15 फीट बर्फ थी। इस बार पैदल रास्ते से लेकर धाम तक कहीं भी बर्फ नहीं दिखी।
वे कहती हैं कि मध्य हिमालय क्षेत्र में बर्फ का न होना गंभीर चिंता का विषय है। इधर, पहली बार धाम पहुंचे राजस्थान के बीरजंग भाई राजपूत का कहना है पहाड़ों की पहचान बर्फ से है। यहां भी वीरानी छाई है। फोटो में केदारनाथ बर्फ से ढका देखा, लेकिन यहां के पहाड़ सूने पड़े हैं।