जिले में 9 अगस्त की रात करीब पौने नौ बजे जखोली ब्लाक के पुलन तल्ला गांव में तीन वर्ष की आरुषि को गुलदार ने निवाला बनाया था। वहां गुलदार की दशहत से बच्चे एक सप्ताह तक स्कूल नहीं जा पाए थे।
इससे पहले जुलाई में कंडारा में एक व्यक्ति को जंगली सुअर ने काटा था, जिसकी उपचार के दौरान देहरादून के एक अस्पताल में मौत हो गई थी। अगस्त्यमुनि ब्लाक के पठालीधार व सिनघाटा गांव में भी जुलाई में गुलदार ने दो मवेशियों को मारा था। स्कूल से लौटते बच्चों पर भी 16 व 18 जुलाई को गुलदार भागा था।
13 अगस्त तड़के वन विभाग ने किमाणा गांव में कुत्ते का पीछा करते हुए घर में घुसे एक गुलदार को 14 अगस्त की सुबह पिंजरे में कैद किया है।
वन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो तीन वर्षों में रुद्रप्रयाग में जंगली जानवरों के हमले से जिले में दो लोगों की मौत और 60 लोग घायल हुए हैं। दूसरी तरफ नगर से लेकर गांवों तक बंदर और जंगली सुअर काश्तकारों की फसलों को तहस-नहस कर रहे हैं।
प्रभावित स्थान
रुद्रप्रयाग नगर क्षेत्र, हितडांग, पुनाड़, गुलाबराय, जवाड़ी सहित संपूर्ण जखोली ब्लाक। अगस्त्यमुनि ब्लाक के सिल्ला, पठालीधार, सिनघाटा, बेंजी-कांडई सहित ऊखीमठ ब्लाक की मनसूना घाटी में जंगली जानवरों का सबसे अधिक खतरा बना है।
जंगलों में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से जानवर बस्तियों की तरफ रुख कर रहे हैं। विभाग के पास ठोस योजना का अभाव होने से समस्या विकट होती जा रही है। जंगलों में अगर जानवरों को पर्याप्त भोजन मिल जाए, तो वे बस्तियों की तरफ रुख नहीं करेंगे। - जगत सिंह चौधरी, जंगली, पर्यावरणविद