तिमली-बड़मा में हुई कार्यशाला, केले की खेती को बढ़ावा देने पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
जखोली। पहाड़ों में पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने को लेकर तिमली-बड़मा में एकीकृत खेती पर कार्यशाला हुई। इस दौरान क्षेत्र में केले की खेती को आय का प्रमुख स्रोत बनाने के साथ-साथ बड़ी इलायची, हल्दी और अन्य नकदी फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। कहा गया कि एकीकृत खेती से किसानों की आय बढ़ेगी।
वक्ताओं ने कहा कि एक ही खेत में विभिन्न फसलों के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य गतिविधियों को जोड़कर किसानों की आय के कई स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। लक्ष्मण धीरवाण ने कहा कि पहाड़ की खेती मूल रूप से प्राकृतिक खेती की परंपरा से जुड़ी है। यहां उत्पादित कृषि उपज को दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। आइसक्रीम उद्यमी वंदना भट्ट ने बताया कि पहाड़ी केले का उपयोग आइसक्रीम में किया जा रहा है और इसे ‘पहाड़ी केले’ नाम से ब्रांड के रूप में विकसित किया गया है। शिव सिंह भंडारी ने पूर्वजों की पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। आयोजनकर्ता दीपक रावत ने किसानों और युवाओं से इस तरह की एकीकृत खेती अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर सुरेन्द्र सिंह, भरत सिंह, सुमन देवी, अनिता देवी, ईश्वर सिंह पंवार, सरोजनी देवी आदि मौजूद रहे।