रुद्रपुर अंबेडकर पार्क में धरने को संबोधित करते भाकपा माले नेता राजा बहुगुणा।
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रुद्रपुर। देश में बढ़ती महंगाई, छंटनी और सार्वजनिक क्षेत्र की सेवाओं में हो रहे निजीकरण के विरोध में वामपंथी पार्टियों भाकपा, माकपा और भाकपा माले के संयुक्त आह्वान पर कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। उन्होंने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर न्यूनतम वेतन कम से कम 18 हजार रुपये करने, वृद्धावस्था, विकलांग, विधवा पेंशन न्यूनतम तीन हजार करने के साथ ही रोजगार के लिए सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की मांग की है।
बुधवार को आंबेडकर पार्क में हुए धरने को संबोधित करते हुए भाकपा माले के राज्य सचिव कामरेड राजा बहुगुणा ने कहा कि आर्थिक मंदी ने आम जनता की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। यह सब मोदी सरकार की नोटबंदी, अतार्किक जीएसटी और कारॅपोरेटपरस्त नीतियों का नतीजा है। आज कश्मीर और एनआरसी के मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम विभाजन के लिए प्रयोग किया जा रहा है। प्रदेश सरकार पलायन, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा क्षेत्र की बदहाली से मुंह मोड़े हुए है। भाकपा के जिला मंत्री एडवोकेट राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि देश के सांप्रदायिक सौहार्द को छिन्न भिन्न किया जा रहा है। जनता को एकजुट होकर इसका जवाब देने की जरूरत है।
सीपीएम के जिला सचिव राजेंद्र सिंह राजा ने कहा कि मोदी सरकार भारत की अर्थव्यवस्था को तबाह करने की जिम्मेदार है। भाकपा माले के राज्य कमेटी सदस्य डॉ. कैलाश पांडेय ने कहा कि राज्य की बदहाली के खिलाफ जनमुद्दों को केंद्र में रखते हुए उत्तराखंड में वाम और लोकतांत्रिक पार्टियों का राज्य स्तरीय साझा मंच बनाया जाना समय की मांग है। कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम छह सूत्री मांगपत्र डीएम कार्यालय में दिया। वहां पर बहादुर सिंह जंगी, आनंद नेगी, भुवन जोशी, ललित मटियाली, दिनेश तिवारी, गोविंद जीना, राजेंद्र शाह, नैन सिंह कोरंगा, मुबारक शाह, उत्तम दास, गोपाल गड़िया, शेर सिंह पपोला सहित अनेक मौजूद रहे।