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पति की नौकरी छूटने के सदमे से पत्नी की मौत

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रुद्रपुर। पुराना जिला अस्पताल परिसर स्थित आवास में सोमवार मध्यरात्रि हृदयगति रुकने से स्वास्थ्य विभाग के पूर्व डीपीएम (जिला कार्यक्रम प्रबंधक) की पत्नी का निधन हो गया। परिजनों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर कार्यरत पति की नौकरी छूटने से वह सदमे में थीं। इसी तनाव ने उनकी जान ले ली।
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ऊधमसिंह नगर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के डीपीएम रहे नीरज सक्सेना करीब 15 वर्षों से संविदा पर कार्यरत थे। गत अक्तूबर में उनकी नौकरी का नवीनीकरण नहीं हुआ। उनकी नौकरी छूटने से पत्नी आभा सक्सेना (49) तनाव में थीं और सोमवार मध्यरात्रि हृदयगति रुकने से उनकी मौत हो गई। उनके पुत्र उजाला सक्सेना और मोहित सक्सेना ने बताया कि उनके पिता की नौकरी छूटने के बाद मां काफी तनाव में थी, जिसका उन्हें सदमा लग गया था। उन्हें कोई बीमारी नहीं थी। इसी सदमे ने उनकी जान ले ली। उन्होंने कहा कि घर में पैसे की कमी नहीं थी, लेकिन पिता को नौकरी से हटाने की कार्रवाई ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया था।
नौकरी को लेकर कोेर्ट में याचिका डाली है पूर्व डीपीएम ने
पूर्व डीपीएम के बेटे मोहित ने कहा कि उनके पिता ने नौकरी का नवीनीकरण नहीं करने के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। सोमवार रात करीब 11 बजे भोजन के बाद उनके मां-पिता ने इस पर चर्चा भी की थी। मध्यरात्रि करीब एक बजे मां को हार्टअटैक पड़ गया। उन्हें निजी अस्पतालों के बाद जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस संबंध में सीएमओ डॉ. शैलजा भट्ट ने कहा कि राज्य व जिला स्वास्थ्य कमेटी की मूल्यांकन रिपोर्ट के बाद डीपीएम पद पर नीरज सक्सेना का नवीनीकरण नहीं किया था। सीएमओ ने गमगीन परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
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कैंची धाम मंदिर गया था दंपति
रुद्रपुर। परिजनों का कहना है कि नौकरी छूटने के बाद आभा पति के साथ कैंची धाम मंदिर भी गईं थीं, जहां दंपती ने पूजा अर्चना की थी। आभा समाज में अपने पति की प्रतिष्ठा के लिए संघर्ष कर रहीं थीं। वह कहती थीं, उनके पति बेहद ईमानदार और कर्तव्य के प्रति समर्पित हैं। वह न्यायालय में दायर याचिका के बारे में जानकारी प्राप्त करती रहतीं थीं।
स्वास्थ्य विभाग में आर्थिक असुरक्षा से जूझ रहे हैं कर्मचारी
रुद्रपुर। जिले में स्वास्थ्य विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारी व कर्मचारी संविदा पर कार्यरत हैं। नवीनीकरण के नाम पर हमेशा उनकी नौकरी पर तलवार लटकी रहती है। जिला स्वास्थ्य कमेटी उनके कार्यों का मूल्यांकन करती है। पिछले वर्ष संविदा पर कार्यरत कई अधिकारियों ने इस्तीफे भी दिए थे, जबकि कुछ आयुष चिकित्सकों को नौकरी से हटा दिया था। इस बार डीपीएम पद पर नीरज सक्सेना का भी नवीनीकरण नहीं हुआ था। परिजनों का कहना है कि उन्हें पूर्व डीएम ने सराहनीय कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र भी दिया था।
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